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राजधानी के 88 गांवों के लिए भूगर्भ जल अपर्याप्त : जल निगम

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हाई कोर्ट।
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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा मौजूद रहे जल निगम के एमडी रमाकांत पांडेय ने कोर्ट को बताया कि लखनऊ के 88 गांवों में पीने के पानी की आपूर्ति के लिए उपलब्ध भूगर्भ जल अपर्याप्त है। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया है कि जल निगम, सिंचाई विभाग तथा सेंट्रल वॉटर कमीशन(सी डबल्यू सी) साथ बैठकर इस समस्या का समाधान निकालें। मामले की अगली सुनवाई 5 जनवरी 2026 को होगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने उत्कर्ष लोकसेवा संस्थान की ओर से दाखिल वर्ष 2016 की जनहित याचिका पर दिया। याची के अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने बताया कि लखनऊ के कई इलाकों में पीने के पानी की समस्या पर वर्तमान याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने मामले में केंद्रीय भूगर्भ जल संसाधन के सचिव, प्रदेश के प्रमुख सचिव भूगर्भ जल को भी पक्षकार बनाने का आदेश दिया है।

वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए बख्शी का तालाब में जमीन चिन्हित





इसी मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद राजधानी में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन का चिन्हीकरण कर लिया गया है। पिछली सुनवाई पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए, जिलाधिकारी लखनऊ विशाख जी ने बताया था कि बख्शी का तालाब के नगवामऊ गाँव में 4.597 हेक्टेयर की जमीन प्रस्तावित की गई है। कहा, चूंकि यह जमीन नगर निगम की सीमा से बाहर है इसलिए नगर निगम से अनापत्ति की भी कोई आवश्यकता नहीं है।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट को जल निगम के एमडी ने बताया था कि अब इस मामले में सेंट्रल वाटर कमीशन व सिंचाई विभाग को आवश्यक तकनीकी चीजें देखनी हैं। इस पर कोर्ट ने सेंट्रल वाटर कमीशन व सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता को पक्षकार बनाने का आदेश दिया था। वहीं, कोर्ट ने प्रमुख सचिव नगर विकास को भी पक्षकार बनाने का आदेश देते हुए, उनसे हलफ़नामा तलब किया था।
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