प्रदेश सरकार ने प्रदूषण रहित बहुंमजली फैक्टरियों की स्थापना की नई नीति तैयार कराई है। इसमें मौजूदा इकाइयों के पास बची भूमि का तय मानक के हिसाब से विभाजन कर प्राधिकरणों को खरीदने जैसा महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल है। यूपीसीडा बोर्ड ने प्रदेश में अपने समस्त औद्योगिक क्षेत्रों में इस नीति पर अमल की मंजूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी। इस समिति में यूपीसीडा, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सदस्य के रूप में थे।
इसी समिति ने फ्लैटेड फैक्टरी औद्योगिक बुनियादी ढांचे की नीति तैयार की है। समिति ने मिश्रित/ प्रदूषणकारी व घरेलू उप-क्षेत्रों को छोड़कर सभी औद्योगिक भूमि उपयोग उप-क्षेत्रों में न्यूनतम 5 एकड़ क्षेत्र में स्थापित प्रदूषण रहित औद्योगिक इकाइयों को फ्लैटेड फैक्टरी में बदलने की संस्तुति की है।
आलोक कुमार ने बताया है कि उद्योगों और निवेशकों को भूमि की आसानी से उपलब्धता के लिए सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए एक समान नीति तैयार की गई है। इसके अंतर्गत प्रदूषण रहित उद्योगों के लिए फ्लैटेड (बहुमंजिली) फैक्टरी औद्योगिक बुनियादी ढांचे की अनुमति दी जाएगी।
आलोक कुमार ने बताया कि यह पहली बार होगा कि प्रदेश में उद्योगों के लिए ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल को अपनाया जाएगा। इसका लाभ रेडीमेड कपड़े, हस्तशिल्प या औद्योगिक विकास प्राधिकरणों द्वारा अनुमन्य अन्य गैर-प्रदूषणकारी विनिर्माण इकाइयां उठा सकेंगी।
एक फ्लैटेड फैक्टरी परिसर में न्यूनतम चार मंजिला भवन ब्लॉक होंगे। इसमें केवल एक प्रकार की मैन्यूफक्चरिंग इकाइयों को अनुमति दी जाएगी। इकाई के बहुमंजिली फैक्टरी में परिवर्तन के प्रस्ताव को संबंधित विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
मौजूदा इकाइयों के अप्रयुक्त औद्योगिक भूखंड के हिस्से को वापस खरीदेंगे प्राधिकरण
इसके अलावा नए निवेशकों को पर्याप्त औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने के लिए मौजूदा इकाइयों में उपलब्ध खाली (सरप्लस) औद्योगिक भूमि के उप-विभाजन (सब-डिवीजन) के लिए एक समान नीति भी बनाई गई है। समिति ने प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में 2.5 एकड़ के न्यूनतम क्षेत्र के साथ औद्योगिक भूखंडों पर उप-विभाजन की अनुमति की नीति तैयार की है।
बशर्ते आवेदन से पहले कम से कम 5 वर्षों के लिए इकाइयां क्रियाशील हों, उत्पादन में रही हों तथा प्राधिकरण के प्रचलित भवन उपनियमों के अनुसार उनमें न्यूनतम निर्मित क्षेत्र हो। बचे भूखंड (उप-विभाजन) के लिए प्रस्तावित अधिकतम भूखण्ड क्षेत्र और वापस खरीदने (बाई-बैक) के लिए मूल रूप से आवंटित भूखण्ड क्षेत्र का 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
साथ ही उप-विभाजित भूखण्ड का न्यूनतम आकार 1000 वर्गमीटर से कम नहीं होगा। यूपीसीडा इस क्षेत्र को अपनी प्रचलित नीति के अनुसार अनुमन्य दर पर वापस खरीद सकेगा और अन्य प्राधिकरणों द्वारा उनके बोर्ड द्वारा अनुमोदित दर पर खरीदा जाएगा।
‘‘ सरकार आयात को कम करने तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए आवश्यक है और आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों के लिए फ्लैटेड फैक्टरी मॉडल को अपनाया जाए।
इससे अधिक भूमि की आवश्यकता वाले अन्य सैक्टर में डिफेंस, आटोमाबाइल आदि के लिए आवश्यक भूमि आसानी से उपलब्ध कराई जा सकेगी। औद्योगिक इकाइयों की सरप्लस भूमि के सब-डिवीजन से प्रदेश में औद्योगिक विकास तेजी से हो सकेगा।’’
- सतीश महाना, मंत्री औद्योगिक विकास