राजधानी लखनऊ में बुधवार को पहली बार किडनी प्रत्यारोपण के लिए निजी और सरकारी अस्पताल के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इससे अपोलो मेडिक्स से पीजीआई के बीच की करीब 11 किमी की दूरी एंबुलेंस ने महज सात मिनट में पूरी कर ली। सामान्य ट्रैफिक में यह दूरी तय करने में 25 से 30 मिनट लग जाते हैं।
अपोलो मेडिक्स हॉस्पिटल के सीईओ व एमडी डॉ. मयंक सोमानी ने बताया कि हादसे में 21 वर्षीय युवक के ब्रेनडेड के बाद परिजनों ने दूसरे मरीजों को जीवनदान देने के लिए उसके अंगदान की प्रक्रिया अपनाने का फैसला लिया। इनमें से एक किडनी व लिवर अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल में ही ऑर्गन डोनेशन का इंतजार कर रहे मरीजों को ट्रांसप्लांट किए गए।
वहीं, कॉर्निया को केजीएमयू में नेत्रदान की प्रतीक्षा कर रहे मरीज को ट्रांसप्लांट करने के लिए भेजा गया और एक किडनी पीजीआई में भर्ती 35 वर्षीय महिला को दी गई। एसजीपीजीआई के डॉक्टरों को जब अपोलोमेडिक्स में किडनी की उपलब्धता का पता लगा तो दोनों अस्पताल के डॉक्टरों ने 10 और 11 मई की पूरी रात क्रॉस मैचिंग की प्रक्रिया पूरी की।
इसके बाद जल्द किडनी पहुंचाने के लिए प्रशासन और पुलिस से सहयोग मांगा, जिन्होंने तुरंत ग्रीन कॉरिडोर बनाया। इसकी सहायता से बुधवार दोपहर को किडनी अपोलो मेडिक्स से पीजीआई पहुंचाई गई। उम्मीद है कि इससे महिला को नया जीवन मिल सकेगा।