सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को अब डॉक्टर बाहर की दवाएं
नहीं लिख पाएंगे।
शेड्यूल एच1 में शामिल मानसिक रोग, थर्ड जेनरेशन
एंटीबायटिक दवाओं और एमडीआर टीबी की दवाओं को बिना पर्चे बिक्री पर रोक
लगाने से ये दिक्कत हुई है।
अभी तक डॉक्टर अस्पताल की दवाओं के साथ ही
एक-दो दवाएं बाहर से लेने के लिए एक पर्ची लिख देते थे।
अब इन दवाओं की
बिक्री का रिकॉर्ड रखने के केंद्र सरकार के आदेश के बाद ओवर द काउंटर सेल
पर प्रतिबंध लग गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य
मंत्रालय के ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 में बदलाव किए जाने का असर
सरकारी अस्पतालों पर भी पड़ा है।
अब डॉक्टर की लिखी पर्ची पर शेड्यूल एच1
श्रेणी में शामिल 46 दवाएं मिलनी बंद हो गई हैं।
ओवर द काउंटर बिक्री पर
एंटीबायटिक के साथ-साथ एंटी टीबी और मानसिक रोगियों के इलाज में दी जाने
वाली 46 तरह की दवाएं नहीं मिल पाएंगी।
जिन दवाओं को शेड्यूल एच1 में रखा
है उनमें 26 एंटीबायटिक, 11 एंटी टीबी, मानसिक रोगियों को दी जाने वाली
(एंटी साइकोट्रॉपिक), दर्द निवारक दवाएं थीं।