शिक्षकों की सीधी भर्ती में धांधली के आरोप में फंसे सीएसए के निलंबित कुलपति मुन्ना सिंह को राज्य विश्वविद्यालय कुलाधिपति व राज्यपाल राम नाईक ने बर्खास्त कर दिया है।
मुन्ना सिंह पर लगे आरोपों की जांच के लिए जस्टिस वीडी चतुर्वेदी और जस्टिस वीसी गुप्ता की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई थी। जिनसे मिली दो अलग-अलग रिपोर्टों को देखने के बाद राज्यपाल ने उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का फैसला लिया।
मुन्ना सिंह को 23 अक्टूबर 2013 को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर में कुलपति के रूप में नियुक्ति मिली थी।
शिक्षकों की सीधी भर्ती और कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम (कैश) के तहत प्रमोशन का विज्ञापन मार्च 2014 में निकाला गया। फिर आवेदन फार्म आए और इनकी स्क्रीनिंग हुई। 12 से 30 दिसंबर के बीच इंटरव्यू कराए गए। इसी बीच शिक्षकों की सीधी भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत राज्यपाल को मिली।
75 शिक्षक, सांसद, विधायक और पूर्व मंत्रियों ने शिकायत करके कहा कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप के साथ उनकी पत्नी वीना सिंह पर भी एक अभ्यर्थी से 10 लाख रुपये मांगे थे। अभ्यर्थी ने फोन पर हुई इस बातचीत की रिकार्डिंग को कुलाधिपति को शिकायती पत्र के साथ सौंपा था। जांच समिति के सामने उपस्थित होने से पहले उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी।