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राज्यपाल रामनाईक बोले, यूपी की कानून-व्यवस्था में सुधार, लेकिन अभी और गुंजाइश बाकी

Fri, 06 Apr 2018 12:00 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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राज्यपाल राम नाईक - फोटो : amar ujala
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राज्यपाल राम नाईक ने पुलिस वीक 2018 के तहत बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन में आयोजित रैतिक परेड की सलामी ली। उन्होंने राष्ट्रपति की ओर से दिए गए वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए दिए गए पुलिस पदक से पुलिस कर्मियों को सम्मानित किया।

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राज्यपाल ने इस परेड की तुलना सेना की परेड से की और कहा कि यह सुखद अनुभव है। सिपाही सरकार का चेहरा होते हैं। थाने स्तर पर लोगों की शिकायतों को ठीक से सुनना चाहिए और उसका समाधान निकालना चाहिए ताकि लोग थानों में बिना झिझक अपनी शिकायतें लेकर आएं। हाल के दिनों में हुए हिंसक आंदोलनों पर राज्यपाल ने कहा कि आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन इसके लिए भी एक लक्ष्मण रेखा तय होनी चाहिए ताकि आमजन को कोई असुविधा न हो।

उन्होंने इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र करते हुए कहा कि निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है, मगर इसमें और सुधार की गुंजाइश बाकी है। पिछले एक साल में 7076 अपराधियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 3563 कुख्यात अपराधी और 1589 इनामी अपराधी हैं।
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राज्यपाल ने कहा कि अवैध शस्त्रों को समाप्त किया जाना चाहिए। साथ ही वैध शस्त्रों का उपयोग कहां हो रहा है इसका खास ध्यान रखना चाहिए। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। उनके अलावा उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, कानून मंत्री बृजेश पाठक, मुख्य सचिव राजीव कुमार, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार, डीजीपी ओमप्रकाश सिंह समेत पुलिस विभाग के तमाम अफसर थे।

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काबिलियत की पहचान में न लगे समय

अफसरों को सम्मानित करते राज्यपाल रामनाईक। - फोटो : amar ujala
नाईक ने कहा, काबिलियत की पहचान समय से की जाए और समय से इनाम दिया जाए तो परिणाम अच्छे होंगे। जिन लोगों को पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है, उनमें 1998, 2001 और 2005 के मामले भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री और डीजीपी से अपेक्षा है कि वे पुराने हिसाब-किताब बराबर कर पिछले एक-दो साल में जिन लोगों ने सराहनीय कार्य किए हैं, उनको जल्द से जल्द पुरस्कार दिलाएंगे। इसे मेरा आदेश भी समझ सकते हैं।
 
‘राज्यपाल को पहली बार पहनाई गई टोपी’
राज्यपाल ने कहा, यह मेरी चौथी रैतिक परेड है। इस बार मुझे गाड़ी से उतरते ही टोपी दी गई। हम कह सकते हैं कि पुलिस वालों ने मुझे टोपी पहनाई। राज्यपाल ने रैतिक परेड में मुख्यमंत्री की मौजूदगी को भी सराहा। उन्होंने कहा कि यहां ट्रैफिक विभाग की टुकड़ियों को जाते देखकर सोच रहा था कि इतनी ही आसानी से लखनऊ की सड़कों पर आम आदमी भी चल सके और उसे जाम से जूझना न पड़े तो कितना अच्छा हो।  
 
आंकड़ों और आदेश को लेकर रही चर्चा
राज्यपाल के भाषण के दो बिंदुओं पर चर्चा रही। एक तो जो निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्तर से होता है, उस पर राज्यपाल कैसे आदेश दे सकते हैं। राज्यपाल ने कहा था कि वीरता पदक कुछ लोगों को 20 साल बाद मिल रहा है, इसे जल्दी दिया जाना चाहिए। वहीं, 2017 में पुलिस से संबंधित मामलों की भी चर्चा रही, जिसमें राज्यपाल ने बताया कि 2017 में 7,79,051 केसों में निर्णय हुआ और 7,09,502 मामलों में अपराधियों को सजा दिलाई गई। यह पुलिस के लिए बड़ा रिकॉर्ड है।

इसके अलावा राज्यपाल ने कहा कि 4.85 लाख करोड़ के इन्वेस्टमेंट के एमओयू साइन किए गए हैं जबकि सरकार अभी तक यह आंकड़ा 4.28 लाख करोड़ ही बताती रही है।
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