अफसरों को सम्मानित करते राज्यपाल रामनाईक।
- फोटो : amar ujala
नाईक ने कहा, काबिलियत की पहचान समय से की जाए और समय से इनाम दिया जाए तो परिणाम अच्छे होंगे। जिन लोगों को पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है, उनमें 1998, 2001 और 2005 के मामले भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री और डीजीपी से अपेक्षा है कि वे पुराने हिसाब-किताब बराबर कर पिछले एक-दो साल में जिन लोगों ने सराहनीय कार्य किए हैं, उनको जल्द से जल्द पुरस्कार दिलाएंगे। इसे मेरा आदेश भी समझ सकते हैं।
‘राज्यपाल को पहली बार पहनाई गई टोपी’
राज्यपाल ने कहा, यह मेरी चौथी रैतिक परेड है। इस बार मुझे गाड़ी से उतरते ही टोपी दी गई। हम कह सकते हैं कि पुलिस वालों ने मुझे टोपी पहनाई। राज्यपाल ने रैतिक परेड में मुख्यमंत्री की मौजूदगी को भी सराहा। उन्होंने कहा कि यहां ट्रैफिक विभाग की टुकड़ियों को जाते देखकर सोच रहा था कि इतनी ही आसानी से लखनऊ की सड़कों पर आम आदमी भी चल सके और उसे जाम से जूझना न पड़े तो कितना अच्छा हो।
आंकड़ों और आदेश को लेकर रही चर्चा
राज्यपाल के भाषण के दो बिंदुओं पर चर्चा रही। एक तो जो निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्तर से होता है, उस पर राज्यपाल कैसे आदेश दे सकते हैं। राज्यपाल ने कहा था कि वीरता पदक कुछ लोगों को 20 साल बाद मिल रहा है, इसे जल्दी दिया जाना चाहिए। वहीं, 2017 में पुलिस से संबंधित मामलों की भी चर्चा रही, जिसमें राज्यपाल ने बताया कि 2017 में 7,79,051 केसों में निर्णय हुआ और 7,09,502 मामलों में अपराधियों को सजा दिलाई गई। यह पुलिस के लिए बड़ा रिकॉर्ड है।
इसके अलावा राज्यपाल ने कहा कि 4.85 लाख करोड़ के इन्वेस्टमेंट के एमओयू साइन किए गए हैं जबकि सरकार अभी तक यह आंकड़ा 4.28 लाख करोड़ ही बताती रही है।