राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि देश और विश्व में बड़ा परिवर्तन हो रहा है। भारत के विचारों का दुनिया स्वागत कर रही है। इंग्लैंड के प्रधानमंत्री हिंदुत्व के विश्व कोष का विमोचन कर रहे हैं। हिंदुत्व क्या है, इसे दुनिया को समझाने की जरूरत है। हिंदुत्व के उस मतलब में कोई फर्क नहीं आया है जो स्वामी विवेकानंद ने बताया था।
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नाईक ने रविवार को निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में केंद्रीय लघु, मध्यम एवं सूक्ष्म उद्योग मंत्री कलराज मिश्र के साथ मासिक पत्रिका राष्ट्रधर्म के विजय विशेषांक का लोकार्पण किया और नौ साहित्यकारों को सम्मानित भी किया।
राज्यपाल ने कहा, दुनिया क्या सोच रही है इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि इंग्लैंड के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन हिंदुत्व के विश्व कोष के 12 अंकों का विमोचन करते हैं।
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विश्व में आ रहे बदलाव को लोगों के सामने लाने की जरूरत है। राष्ट्रधर्म ने देश की आजादी के बाद से वैचारिक परिवर्तन में अहम योगदान दिया है।
इतिहास की पराजय कई बार होती है विजय
राज्यपाल ने कहा कि पंडित दीनदयाल और अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे चिंतन और विचार की शक्ति बनाया। इतिहास को देखने की दृष्टि दी। बीच में राष्ट्रधर्म की धारा रुकी थी। जैसे गंगा को पहले की तरह अविरल बनाने की तैयारी हो रही है उसी तरह राष्ट्रधर्म को और गति एवं प्रबुद्धता के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हमने आज तक जो पढ़ा है, इतिहास उससे अलग है। अंग्रेज जिस 1857 को गदर कहते थे, सावरकर ने उसे प्रथम स्वाधीनता संग्राम कहा।
इतिहास में जिसे पराजय कहते हैं, कई बार वह विजय होती है। यदि औरंगजेब ने छत्रपति शिवाजी को आगरा के किले में कैद न किया होता तो रिहा होने के बाद उन्होंने इतना बड़ा साम्राज्य न बनाया होता।
नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका से वीजा नहीं मांगा लेकिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने चुनाव में ऐसा निर्णय दिया कि अमेरिका वीजा भेजने को मजबूर हो गया, यही विजय है।
मोदी 125 करोड़ लोगों के आत्मविश्वास का प्रतीक
केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने कहा, पहले युद्ध के माध्यम से हार-जीत होती थी लेकिन अब मतदान के जरिये विजय-पराजय होती है। पिछले लोकसभा चुनाव में लोकतंत्र की ताकत प्रत्यक्ष दिखाई पड़ी।
जनता ने नरेन्द्र मोदी को विकल्प के तौर पर प्रधानमंत्री मान लिया था। अब वह 125 करोड़ लोगों की शक्ति, स्वाभिमान और आत्मविश्वास का समुच्चय हैं।
उन्होंने जनधन योजना और मंगल मिशन जैसी उपलब्धियों का जिक्र किया और उम्मीद जताई कि मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरू के सिंहासन पर बैठेगा।
राष्ट्रधर्म के संपादक आनंद मिश्र अभय ने विजय विशेषांक की जानकारी दी। इस मौके पर आनंद मोहन चौधरी, ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) अरुण वाजपेयी, डॉ. सुशील त्रिवेदी, आशीष माहेश्वरी और पवनपुत्र बादल आदि मौजूद रहे।
राज्यपाल ने कहा, जब उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत को भोजन पर बुलाया तो कुछ लोगों ने विवाद खड़ा किया। इस कार्यक्रम में शामिल होने के बारे में भी पूछा गया। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत को उन्हें अपने घर बुलाया और आज वह अपने घर में आए हैं।
नाईक ने राष्ट्रधर्म में काम कर चुके स्वर्गीय बजरंग शरण तिवारी के निधन पर दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। कहा, भाऊराव देवरस ने दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रधर्म की जिम्मेदारी सौंपी थी। बजरंग शरण तिवारी उनके सहयोगी थे।
राज्यपाल ने राष्ट्रधर्म के संपादक को सलाह दी कि वे वर्ष में एक के बजाय दो विशेषांक निकालें। अब विज्ञापन भी ज्यादा मिल सकता है, अच्छे दिन आ गए हैं। उन्होंने इसकी प्रिंटिंग क्वालिटी सुधारने की सलाह भी दी। कहा कि इसका कंटेंट अच्छा है। जो अच्छा होता है वह ज्यादा बेचा जाता है लेकिन जो अच्छा है और दिखता भी अच्छा है, उसे और ज्यादा बेचा जा सकता है।
समारोह में अलीगंज की मंजू शुक्ला और राजाजीपुरम के डॉ. योगेश समेत नौ साहित्यकारों को पुरस्कृत किया गया। निर्णायक मंडल के सदस्य और कई जिलों के राष्ट्रधर्म के अभिकर्ता भी सम्मानित हुए।