राज्यपाल राम नाईक ने कहा है कि रक्तदान करके दूसरे को जीवनदान देना सबसे बड़ा दान है। धर्म, जाति, संप्रदाय, अमीर व गरीब के आधार पर रक्त का वर्गीकरण नहीं किया जा सकता है, क्योंकि रक्त सिर्फ रक्त होता है और उसका कार्य भी केवल सभी का जीवन बचाना है। इसलिए रक्त के आधार पर किसी को नहीं बांटा जा सकता है।
राज्यपाल ने यह बात रक्तदान दिवस पर आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर के उद्धाटन के मौके पर कही। शिविर का आयोजन केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मेमोरियल सोसाइटी की ओर से संकुक्त रूप से किया गया था।
राज्यपाल ने कहा कि समाज के लोगों में स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन होना चाहिए। शिविर के माध्यम से जातिगत आधार पर रक्तदान को लेकर लोगों में सदियों से व्याप्त भ्रांतियों को दूर किया जाना चाहिए। ताकि अधिक से अधिक लोगों के रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा सके।
सबसे बड़ा दान रक्तदान
- फोटो : amar ujala
राज्यपाल ने कहा कि अंगदान, नेत्रदान, देहदान और भूदान जैसे दान के तो बहुत तरीके हैं, लेकिन सबसे बड़ा दान रक्तदान ही है, क्योंकि इस दान से लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है। इस अवसर पर राज्यपाल ने शिविर में रक्तदान करने वाली प्रमुख सचिव जूथिका पाटणकर, परिसहाय स्क्वाड्रन लीडर प्रवीण भौरिया, प्रीति मिश्रा, अमित वर्मा, बृजेश कुमार, अजीत, मंयक, सलमान अहमद सहित 11 लोगों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मेमोरियल सोसाइटी के अध्यक्ष नरेश चन्द्रा, केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट और तूलिका चन्द्रा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।