मुख्यमंत्री ने कहा कि एक के बाद दूसरी शादी करने वाले हिंदू पुरुषों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पांच बार तीन तलाक की कुप्रथा बंद करने का आदेश दिया लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने वोट बैंक के चलते कानून बनाकर इस आदेश को उलट दिया। 1985 का शाहबानो प्रकरण का उदाहरण सामने है।
उन्होंने कहा कि छद्म धर्मनिरपेक्षता की राजनीति करने वाली इन पार्टियों से पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने इस तरह के अमानवीय कानूनों को क्यों जारी रखा? सही बात तो यह है इस तरह के कानून आजादी के तत्काल बाद ही रद्द होने चाहिए थे। यह कानून 22 मुस्लिम देशों में बहुत पहले ही समाप्त हो चुका है। अब भी कुछ पार्टियां और नेता तीन तलाक के खिलाफ बने कानून पर सवाल उठा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी से कहा कि वे तीन तलाक पीड़ित और परित्यक्ता महिलाओं की मदद के लिए शीघ्र ही अल्पसंख्यक कल्याण एवं समाज कल्याण विभाग के साथ मिलकर कार्य योजना तैयार करें।
उन्होंने अवनीश अवस्थी को इसकी समीक्षा स्वयं करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, पांच मुस्लिम महिलाओं ने मुझे अपनी समस्या मंच पर सुनाई। प्रदेश का गृह विभाग उनके मुकदमों को निशुल्क लड़ने का तंत्र विकसित करे।
उन्होंने पीड़ित महिलाओं को आवास की सुविधा और बच्चों को पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की सुविधा भी देने की घोषणा की। सीएम ने कहा कि जब तक समाज का कोई भी तबका कमजोर रहता है, पूरा समाज प्रगति नहीं कर सकता। इसलिए तीन तलाक और परित्यक्ता महिलाओं के लिए ठोस कार्य योजना तैयार की जाए।
मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक महिलाओं को वक्फ संपत्ति में हक देने और इससे जोड़ने के लिए भी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा की सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के खिलाफ लड़ने वाली बहनों के सहयोग से मंडल स्तर पर भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।