प्रदेश में वर्ष 2012 में हुए बेसलाइन सर्वे में ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 2 करोड़ 51 लाख 23 हजार परिवार चिह्नित किए गए थे। इनमें से 2.49 करोड़ परिवारों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध हो गई है। इनमें ऐसे परिवार भी शामिल हैं जिनके पास पहले से शौचालय थे या जिन्होंने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जागरूकता अभियान के बाद शौचालय बनाए हैं। निदेशक स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) आकाशदीप ने बताया कि प्रदेश में चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 में अभी तक 96 लाख 45 हजार शौचालयों का निर्माण हुआ है। वर्ष 2017-18 में कुल 44 लाख और वर्ष 2016-17 में 17 लाख शौचालय बने थे। दो अक्तूबर 2014 से पहले निर्मल भारत अभियान के तहत भी शौचालय बनाए जा रहे थे। इस तरह कुल मिलाकर 1.55 करोड़ शौचालयों का निर्माण कराया गया है। बाकी शौचालय उन लोगों ने खुद बनाए हैं जिनके पास ट्रैक्टर है, जिनके पक्के घर हैं और जो एपीएल श्रेणी में आते हैं।
निदेशक, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) आकाशदीप ने बताया कि प्रदेश में कुल 98807 गांव है। इनमें से 71384 को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। ओडीएफ गांवों में शौचालयों के 72 फीसदी फोटो अपलोड कर दिए गए हैं। 27 सितंबर तक की सूचना के मुताबिक 149 ब्लॉक व 16 जिले ओडीएफ घोषित कर दिए हैं। जो गांव ओडीएफ घोषित नहीं हुए हैं, उन्हें खुल में शौच से मुक्त करने का काम लगभग पूरा हो चुका है। यही स्थिति जिलों के साथ हैं। अधिकतर जिले बहुत जल्द खुले में शौच से मुक्त हो जाएंगे। 2012 के बेसलाइन सर्वे से छूटे हुए परिवारों में शौचालय बनाने का काम भी अगले एक-दो माह में पूरा कर लिया जाएगा।
शामली, बिजनौर, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, इटावा, कासगंज, सहारनपुर, कौशांबी, अमरोहा, हाथरस, मुरादाबाद व कन्नौज।