सूबे के एक वजीर के भी अपने ठाठ हैं। वजीर के महकमे का पिछले दिनों एक जलसा था।
कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया भी सारा काम-काज छोड़कर पूरे चार घंटे मौजूद रहे। यूं तो कार्यक्रम पूरा विभागीय था। इसका खर्चा भी विभाग ने उठाया था।
मुखिया तो ठीक लाइन पर चले लेकिन वजीर ने कार्यक्रम को राजनीतिक रंग देने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। जलसे में मौजूद एक समुदाय के लोगों को दूसरी पार्टियों का डर भी दिखाया।
यह भी बताने की कोशिश की कि वे ही उन लोगों के रहनुमा हैं।
वजीर का इधर भाषण चल रहा था तो पीछे खड़े एक बुजुर्ग धीरे से बोल ही पड़े ‘...क्या इन्हीं सब बातों को सुनाने के लिए इतनी दूर से पांच-सात सौ रुपये खर्च कराकर हमें बुलवाया...।’
जलसे में आने वाले भले ही ठगा महसूस करें लेकिन वजीर ने अपना हित जरूर साध लिया।