नौकरशाही की अड़ंगेबाजी से सरकारी खजाने को दो तरह से चपत लग रही है। पहला यह कि जिन निरीक्षकों ने मनोरंजन विभाग में रहते हुए पिछले वित्तीय वर्ष में 725 करोड़ रुपये का राजस्व वसूल कर सरकार को दिया था, उन निरीक्षकों ने इस वित्तीय वर्ष में एक पैसे की वसूली नहीं की है। दूसरा नुकसान यह है कि विभाग के 110 निरीक्षकों को 5 महीने से बैठाकर सरकारी खजाने से हर महीने लाखों रुपये वेतन दिया जा रहा है।
अपर मुख्य सचिव वाणिज्यकर आलोक सिन्हा का कहना है कि कैबिनेट के फैसले के मुताबिक मनोरंजन कर निरीक्षकों का समायोजन सहायक वाणिज्यकर अधिकारी के पद पर किया जाना था, लेकिन वाणिज्यकर विभाग में यह पद है ही नहीं। इसलिए इनका समायोजन उस समय अटक गया था। इस तकनीकी दिक्कत को दूर करने के लिए कार्मिक और वित्त विभाग से चर्चा हो चुकी है। जल्द ही सहायक वाणिज्यकर अधिकारी का पद सृजित किया जाएगा। कोशिश है कि अगले सप्ताह तक निरीक्षकों का समायोजन कर दिया जाए।