कोरोना के चलते बदली परिस्थितियों में सरकार की पैरवी नहीं कर पा रहे शासकीय वकीलों को 80 फीसदी तक फीस का भुगतान किया जाएगा। विधि एवं न्याय मंत्री बृजेश पाठक ने मंगलवार को लोक भवन में इसकी घोषणा की। उन्होंने मीडिया को बताया कि सिविल के शासकीय वकीलों को 70 फीसदी और फौजदारी के शासकीय वकीलों को 80 फीसदी तक फीस का भुगतान किया जाएगा।
पाठक ने बताया कि दीवानी, राजस्व, फौजदारी, अर्बन सीलिंग (भूमि अर्जन) न्यायालय के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधीन सभी न्यायालयों में शासकीय अधिवक्ता नियुक्त हैं। ये अधिवक्ता वर्चुअल और भौतिक रूप से उपस्थित होकर पैरवी करने के लिए तैयार हैं, लेकिन कोरोना के चलते बदली परिस्थितियों में यह मौका नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा सरकार ने इन वकीलों को न्यायालय की ओर से भौतिक उपस्थिति की अनुमति मिलने तक बहस की फीस का भुगतान सामान्य कार्यदिवस के आधार पर करने का फैसला किया है। इसके लिए 4 करोड़ 50 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट की ओर से वकीलों को नियमित भौतिक उपस्थिति की अनुमति प्रदान करने तक फौजदारी व सिविल के राज्य विधि अधिकारियों को भी फीस का भुगतान किया जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के शासकीय वकीलों के लिए 11 करोड़ और हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के वकीलों के लिए 8 करोड़ 9 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
बजट प्रावधान 220 करोड़ का, 150 करोड़ जारी
विधि एवं न्याय मंत्री ने बताया कि सरकार ने इस वर्ष शासकीय अधिवक्ताओं की फीस के लिए 220 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। इनमें से 150 करोड़ रुपये का बजट जारी किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के शासकीय अधिवक्ताओं के लिए 7 करोड़ रुपये, इलाहाबाद हाईकोर्ट के शासकीय अधिवक्ताओं के लिए 45 करोड़, हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के अधिवक्ताओं के लिए 35 करोड़ और 75 जिलों के शासकीय अधिवक्ताओं के लिए 63 करोड़ 60 लाख रुपये का बजट प्रावधान है।
इसके तहत जिला न्यायालयों में वकीलों के चैंबर के लिए पांच करोड़ रुपये दिए जाएंगे। लखनऊ, कासगंज और इलाहाबाद जिला न्यायालय में वकीलों के चैंबर का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त नियोजन विभाग से त्वरित आर्थिक सहायता मद में भी विभिन्न जिलों में वकीलों के चैंबर का निर्माण कराया जा रहा है।