शासन ने होमगार्ड स्वयंसेवकों के खिलाफ होने वाली अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया निर्धारित करते हुए निर्देश दिया है कि किसी आपराधिक मामले में जेल जाने पर उसे तत्काल निलंबित किया जाएगा। वहीं सात वर्ष से अधिक सजा वाले आपराधिक मामलों में अदालत में आरोप पत्र दाखिल होने पर उसे विभाग से निष्कासित कर दिया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव होमगार्ड अनिल कुमार द्वारा जारी शासनादेश के मुताबिक किसी आपराधिक मामले में मुकदमा दर्ज होने पर जेल जाने के बाद होमगार्ड को जमानत मिल जाती है, तो उसके प्रत्यावेदन पर विचार करते हुए निलंबन समाप्त कर ड्यूटी पर तैनात किया जा सकता है। इसी तरह सात वर्ष या इससे कम सजा वाले मामलों में न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल होने तथा ट्रायल के दौरान जमानत पर रिहा होमगार्ड को ड्यूटी पर लगाया जा सकता है।
हालिया शासनादेश जारी होने से पूर्व सात वर्ष या इससे कम सजा वाले आपराधिक मामलों में विभाग से हटाए गए होमगार्ड स्वयंसेवकों का प्रत्यावेदन लेकर उनका परीक्षण करने के बाद अदालत का अंतिम निर्णय आने तक सेवा में बहाल रखा जाएगा। भले ही उनको निष्कासित किए छह वर्ष से अधिक की अवधि हो चुकी हो, अथवा उनकी आयु 50 वर्ष से अधिक हो। अदालत के अंतिम निर्णय में दोष सिद्ध होने पर उनको सेवा से निष्कासित किया जाएगा। इसी तरह सात वर्ष से अधिक सजा वाले आपराधिक मामलों में संलिप्तता के आधार पर विभाग से हटाए गए होमगार्ड स्वयंसेवकों को अदालत द्वारा दोषमुक्त किए जाने पर बहाल किया जाएगा। सभी प्रकरणों में बहाली से पहले होमगार्ड स्वयंसेवकों का चिकित्सा परीक्षण और चरित्र सत्यापन उसी तरह कराया जाएगा, जैसे भर्ती के समय किया जाता है।