कोर्ट ने कहा है कि कैग सभी सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों आदि का ऑडिट दो माह में पूरा कर ले। अस्पतालों में पिछले 10 वर्षों के दौरान फंड की उपलब्धता और उपयोग की जांच करने का आदेश दिया है।
इसमें अनियमितता मिलने पर संबंधित विभाग को उस कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। पहले बड़े अस्पतालों और उसके बाद जिला स्तर के सरकारी अस्पतालों का ऑडिट करना होगा। तीसरे चरण में सीएचसी, पीएचसी और अन्य चिकित्सा केंद्रों की जांच होगी।
हाईकोर्ट ने कहा है कि जो सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करता पाया जाए उससे सरकार नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउंस की वसूली करे। रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों और पैथोलॉजी सेंटरों की भी विजलेंस से नियमित जांच कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इलाहाबाद में मोतीलाल नेहरू स्थित ट्रॉमा सेंटर पर रिपोर्ट मांगी है। कहा है कि ट्रॉमा सेंटर की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट ने अदालत में झूठा हलफनामा दाखिल करने पर प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे और मोतीलाल नेहरू चिकित्सालय इलाहाबाद के प्राचार्य एसपी सिंह को नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा है कि अदालत में झूठ बोलने पर क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए और अदालत की अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ की जाए।