अयोध्या में प्रभु राम की भव्य प्रतिमा के निर्माण के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) के वैज्ञानिकों से सहयोग मांगा गया है। इसके लिए देश की सभी आईआईटी के हेड्स को पत्र भेज दिए गए हैं। जिन वैज्ञानिकों के नाम फाइनल होंगे, उन्हें मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की गई समिति में शामिल किया जाएगा।
योगी सरकार की अयोध्या में 201 मीटर ऊंची प्रभु राम की प्रतिमा बनाने की योजना है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर छह आर्किटेक्ट्स का प्रस्तुतीकरण के लिए चयन भी कर लिया गया है। यहां बता दें कि इस मुद्दे को लेकर अक्टूबर में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संबंधित विभागों की बैठक भी हो चुकी है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, प्रतिमा की कुल ऊंचाई 201 मीटर हो सकती है। इसमें 50 मीटर का पेडिस्टल और 151 मीटर की प्रतिमा बनाने पर विचार किया जा रहा है। प्रतिमा के ठीक नीचे पौराणिक कथाओं पर आधारित म्यूजियम होगा। इस पर करीब तीन हजार करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है।
प्रदेश सरकार ने अहमदाबाद में स्थापित की गई 182 मीटर ऊंची स्टेच्यु ऑफ यूनिटी के अध्ययन के लिए पर्यटन महानिदेशक अवनीश अवस्थी के नेतृत्व में एक भी टीम भेजी थी। इसमें राजकीय निर्माण निगम के फैजाबाद के महाप्रबंधक यतेद्र कुमार और मुख्य आर्किटेक्ट केके अस्थाना भी शामिल थे।
टीम ने अपने वहां के अनुभव वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साझा किए हैं। चूंकि, यह विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी, इसलिए इसे सुरक्षा और आर्किटेक्चर के लिहाज से भी बेजोड़ बनाने का फैसला किया गया है।
कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम की ओर से इस बाबत सभी आईआईटी को पत्र भेजकर अनुरोध किया गया है कि प्रोजेक्ट से जुड़ने के इच्छुक विशेषज्ञ वैज्ञानिकों का चयन किया जाना है। ताकि, समिति को उनके एक्सपर्ट्स कमेंट भी मिल सकें।