बसपा विधानमंडल दल के नेता लालजी ने वर्मा ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण आम लोगों को गुमराह करने वाला है। यहीं नहीं सरकार ने इसे पढ़वाने के लिए राज्यपाल को गुमराह किया है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से राज्यपाल भी अभिभाषण पढ़ने को तैयार नहीं थी। अभिभाषण में न तो सरकार की कोई नीतियां दिख रही हैं और न ही कोई विजन दिख रहा है। इसलिए वह इस अभिभाषण का विरोध करते हैं। वर्मा ने बातें राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने सरकार ने इतना ही प्रभावी तैयारी की थी तो भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या एक करोड़ से अधिक कैसे हो गई। उन्होंने प्रदेश की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाया।
सबसे बड़ा भ्रष्टाचार साबित होगा गौशाला : आराधना
कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने अभिभाषण में गोवंश संरक्षण के दावे को खारिज करते हुए कहा कि गोवंश के संरक्षण के नाम पर बनाए गए गोशाला का निर्माण आने वाले समय में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार साबित होगा। गोशाला में रखे गए गोवंश बदहाल हैं। अब तक हजारों की संख्या में गोवंश की मौत हो चुकी है। किसानों के मुद्दे पर कहा कि प्रदेश सरकार को कृषि बिल को रद्द करने से संबंधित प्रस्ताव विधानसभा में पारित करके केंद्र को भेजा जाना चाहिए।
सपा-बसपा ने श्रमिकों का मजाक उड़ाया : संजय
पीलीभीत सदर से भाजपा विधायक संजय सिंह गंगवार ने कोरोना काल में श्रमिकों की मौत का आरोप लगाने वाले सपा व बसपा सदस्यों को जवाब देते हुए कहा कि कोरोना काल में दोनों दल के लोगों ने सड़क पर उतरकर श्रमिकों की मदद नहीं की। अलबत्ता उनकी मदद कर रही सरकार पर आरोप लगाकर श्रमिकों का मजाक उड़ाया है। उन्होंने बिजली आपूर्ति, बेसिक शिक्षा आदि के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए विपक्ष को आडे़ हाथों लिया।
तो टोपी में क्यों नहीं लिखा ‘राजभर’ : स्वामी प्रसाद
पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनिल राजभर और सुभासपा सदस्य ओमप्रकाश के बीच जमकर नोकझोंक हुई। ओमप्रकाश ने पिछड़ों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि बहराइच में लगाए गए प्रतिमा के शिलापट्ट में सुहेलदेव के नाम के साथ उनकी जाति का उल्लेख न किए जाने का मद्दा उठाया। इसी बीच श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने ओमप्रकाश व उनके दल के सदस्यों द्वारा लगाए गए टोपी पर लिखे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की ओर इशारा करते हुए चुटकी ली कि ‘आपने भी तो अपनी टोपी में सुहेलदेव के साथ राजभर नहीं लिखा है, तो सरकार ने नहीं लिखा तो आपको भी आपत्ति नहीं करनी चाहिए।’