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Lucknow News: पहले शांति खरीदी जाती थी, अब कश्मीर में शांति स्थायी है

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लखनऊ। जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीर के नौजवानों के हाथ में अब पत्थर नहीं, लैपटॉप और गैजेट्स हैं। वर्ष 2019 से पहले तक जम्मू-कश्मीर में शांति खरीदी जाती थी। आतकवादियों से समझौते किए जाते थे लेकिन अब वर्तमान सरकार स्थायी शांति स्थापित करने में विश्वास रखती है। आतंकवाद के पूरे ईको सिस्टम को नेस्तनाबूद कर दिया गया है।
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मनोज सिन्हा गोमतीनगर स्थित महामना मालवीय विद्या मंदिर विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में ‘जम्मू कश्मीर की वर्तमान स्थिति चुनौतियां एवं समाधान’ विषय पर बोल रहे थे। आयोजन ‘महामना मालवीय मिशन’ व ‘नारायण सेवा संस्थान’ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। मनोज सिन्हा ने कहा कि घाटी से हिंदुओं का पलायन रुका है और असुरक्षा का भाव खत्म हुआ है। शोपियां, पुलवामा, कुलगाम व घाटी के अन्य जिलों में सिनेमाहॉल खुल गए हैं। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म पठान श्रीनगर में हाउसफुल होना बदलाव की निशानी है। आने वाले समय में सभी जिलों में सिनेमाहाल खुल जाएंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मालवीय मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभु नारायण ने की। संचालन अजय श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर डॉ. ठक्कर, देवेंद्र स्वरूप शुक्ला, डॉ. एके त्रिपाठी डॉ. देवेंद्र अस्थाना, आरएन वर्मा और प्रदीप मिश्रा आदि मौजूद रहे।
जम्मू-कश्मीर में यूपी से भी कम अपराध
मनोज सिन्हा ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़े देखें तो उत्तर प्रदेश से भी कम अपराध जम्मू-कश्मीर में है, लेकिन आतंकवाद के कारण ये चर्चा में रहता है। मौत का कोई मुआवजा नहीं होता। हमारी जांबाज फौज और केंद्र सरकार के सामूहिक प्रयासों से अब आतंकवाद की कमर टूटी है और अलगाववाद खत्म हो चुका है। भारतीय सीमा में अब घुसपैठ लगभग असंभव है। जम्मू कश्मीर के भूलेख रिकॉर्ड्स को पूरी तरह से डिजिटलाइज कर दिया गया है। मेरा मानना है कि यदि महाभारत काल में यह डिजिटलाइजेशन होता तो महाभारत न होती।
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