भाजपा
में एक प्रवक्ता की कार्यशैली पर सवाल उठे कि वह निगेटिव खबरें भी मीडिया
को बता देते हैं।
बड़े नेताओं की नजरें टेढ़ी हो गईं। लेकिन प्रवक्ता भी
पीछे नहीं हटे। जवाब दिया-गुड-गुड न्यूज ही दोगे तो मीडिया वालों का भरोसा
उठ जाएगा।
कुछ निगेटिव तो बताना ही पड़ेगा न! ऐसा कैसे हो सकता है कि चार
राजनीतिक लोग एक साथ बैठें और कोई निगेटिव बात ही न हो।
चाणक्य का कथन भी
सामने रख दिया कि राजनीति में ढेर सारे फायदों के लिए थोड़ा नुकसान भी
उठाना पड़ता है। प्रवक्ता का आत्मविश्वास देख बड़े नेता बैकफुट पर आ गए।
मंथन शुरू हुआ। सहमति बनी कि इस प्रवक्ता की कार्यशैली ही ठीक है। इसे लागू
किया जाए।
तभी तो इन दिनों भाजपा में मीडिया का काम देख रहे कार्यकर्ता
बताते हैं, ‘अमुक नेता फलां इलाके में गए थे। खबर का पॉजिटिव पक्ष यह
है...एक निगेटिव पक्ष भी है, चाहें तो अपनी खबर का हिस्सा बना सकते हैं।’