अयोध्या से जुड़ी एक चिट्ठी को लेकर यूपी सरकार में इतना घमासान मचा कि लॉ एंड ऑर्डर के मुखिया तक को हटा दिया गया।
नए हाकिम आए, तो तेवर भी नए लाए। अयोध्या में वीएचपी के कार्यक्रम को लेकर उन्होंने पहले तो कड़े तेवर दिखाए, लेकिन असर दिखाने में कामयाब नहीं रहे।
जब दूसरे दिन वीएचपी ने दूसरे दिन पूरे प्रदेश में प्रदर्शन करके दिखा दिया, तो नए हाकिम को लेकर भी चर्चा गर्म होने लगी। कुछ लोगों ने उनकी कुंडली निकालनी शुरू की, तो कुछ लोग राजनीतिक गुणा भाग लगाने लगे।
इतना सब चल ही रहा था कि मुई हिंसा फिर मुजफ्फरनगर में जा गिरी। उधर, मुजफ्फरनगर उग्र हुआ और इधर नए हाकिम छुट्टी पर चल दिए।
इनका छुट्टी पर जाना ही था कि नौकरशाही में फिर चर्चा शुरू हो गई। तमाम अफवाहें प्रशासन के गलियारों से लेकर सियासी दरबार में घूमनें लगीं।
कई अफसरान तर्क दे रहे हैं कि नए हाकिम अपने पुराने अमले के लिए तो मुफीद थे, लेकिन कानून व्यवस्था चलाना इनके बस का नहीं। इनसे बेहतर तो पुराने वाले 'साहिब' ही थे।
नए हाकिम पर यह भी तंज कसे जा रहे हैं कि वह कई डीएम और कमिश्नर स्तर के अधिकारियों से जूनियर हैं। अब विभाग के लोग जहां पूछ रहे होंगे....तेरा क्या होगा कालिया, तो हाकिम साहब सोच रहे होंगे...ये कहां आ गए हम...