कहते हैं कि, जंगल में मोर नाचा, किसने देखा। कुछ ऐसा ही हाल वजीर-ए-आला के दौरों को लेकर भी हुआ।
राजधानी की गोमतीनगर विस्तार की एक कॉलोनी में पहुंचे तो उनके गुस्से की गाज सात अफसरों पर गिरी।
कहा जा रहा है कि सीएम के गुस्से की इटेंसिटी उतनी नहीं थी, जितने तेवर कॉलोनी की बदहाली को लेकर अखबारों में हुई रिपोर्टिंग में दिखी।
ऐसे में राजधानी के अखबारों की दो खास दिनों की छुट्टियों ने अफसरों को बड़ी राहत दी।
इन दिनों चर्चा-ए-आम है कि मुख्यमंत्री ने बड़े समाजवादी नेता के नाम पर जिस विशाल पार्क को जनता के हवाले किया, उसको देखने के लिए वे दो बार निकले।
पहले ईद की शाम और फिर स्वतंत्रता दिवस के दिन। वजीर-ए-आला ने कई कमियां देखकर अफसरों को सख्त निर्देश दिए।
इत्तेफाक देखिए, दोनों ही दिन राजधानी में अखबारों के दफ्तर बंद थे।
एक अफसर ने टिप्पणी की, अच्छा रहा वजीर-ए-आला के दौरे के समय मीडिया नहीं था। वरना, खबरे छाप-छाप कर दिलों की धड़कनें तो बढ़ा ही देते।