सत्ता के गलियारे में आजकल फिर चाचा की चर्चा है। खास तौर पर ब्यूरोक्रेसी में चाचा को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं।
सुगबुगाहट है कि चाचा अपने बेटे को ज्यादा ही प्रमोट करने में जुटे हैं इसलिए भतीजे ने उनके पर कतरने शुरू कर दिए हैं।
कहा तो यहां तक जा रहा है कि कुछ बड़े अफसरों को यह संकेत दे दिया गया है कि चाचा को बहुत ज्यादा तरजीह न दी जाए।
इसकी पुष्टि पार्टी में चाचा के नजदीकी भी कर रहे हैं। चाचा के करीबियों का कहना है। कि अब उनकी नहीं चल रही है। उनके कहने पर कोई काम नहीं हो रहा है।
अपने विभाग के अफसरों को डांट-फटकार कर या दबाव बनाकर भले ही छोटा-मोटा काम करा लें लेकिन दूसरे विभागों में उनकी नहीं चल रही है।