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कौन है विधाता....

Tue, 02 Sep 2014 01:49 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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हारे को हरिनाम यूं ही नहीं कहा जाता। इसलिए भाजपा के कद्दावर नेता और केंद्र में मंत्री ने जब यह कहा कि विधाता सब देख रहा है
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तो किसी को ताज्जुब नहीं हुआ। आखिर ऐसे ही दिनों में लोग भगवान को याद करते हैं। पर, ताज्जुब इस बात पर हो रहा है

कि राजनीति के मंझे खिलाड़ी से ऐसी चूक हुई ही क्यों जो सफाई देनी पड़ रही है। आरोप सच या है झूठ, यह तो वास्तव में विधाता ही जानता होगा।

पर, लाख टके का सवाल है कि यह बात उठी ही क्यों? अगर यह घटना सच है तो वह सिर्फ तीन लोगों के बीच थी।

इसलिए यह चर्चा में कैसे आई? अगर घटना में दम नहीं है तो बगैर जांच सफाई देने की जरूरत ही क्या थी।

कहीं ऐसा तो नहीं कि भाजपा के नए भाग्य विधाता ही चाह रहे हैं कि वर्षों पार्टी व उसके नेताओं को भाग्य व भगवान के सहारे छोड़े रखने वालों को भी विधाता के खेल का एहसास हो जाए।
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