जान जोखिम में डालकर काम करने वाले बिजली संविदाकर्मियों के दिन अब बहुरेंगे। पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन आउटसोर्स सर्विस प्रोवाइडर्स (ठेकेदारों) के जरिये संविदा पर नियुक्त श्रमिकों का श्रम विभाग में पंजीकरण कराने जा रहा है।
इसके बाद 40 हजार से ज्यादा संविदा श्रमिकों को दुर्घटना बीमा समेत अन्य योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन संजय अग्रवाल ने इसकी मंजूरी दे दी है।
आउटसोर्स के माध्यम से सब स्टेशनों, बिजलीघरों तथा अन्य जगहों पर काम कर रहे संविदा श्रमिकों का पंजीकरण उप्र भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम 1996 के तहत होगा।
इसके बाद ये भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से संचालित श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ पाने के हकदार हो जाएंगे।
अब सभी बिजली कं पनियों से संविदा श्रमिकों का ब्यौरा मंगाकर उनका पंजीकरण कराया जाएगा।
20 नवंबर को बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके ज्यादा से ज्यादा श्रमिकों को इसके दायरे में लाने के निर्देश दिए जाएंगे।
50 रुपये में होगा पंजीकरण
पहली बार पंजीकरण के लिए प्रति श्रमिक 50 रुपये लगेंगे, जो पावर कॉर्पोरेशन देगा। इसके बाद हर साल सदस्यता के नवीनीकरण के लिए संबंधित श्रमिक को 50 रुपये देने होंगे।
अगर कोई पंजीकृत श्रमिक दूसरे सर्विस प्रोवाइडर के जरिये सेवा में लिया जाता है तो उसका पुराना पंजीकरण ही मान्य होगा।
मौजूदा समय में सर्विस प्रोवाइडर बिना लिखा-पढ़ी के श्रमिकों की नियुक्ति करा देते हैं जिससे दुर्घटना होने पर श्रमिकों के आश्रितों को कोई सहायता नहीं मिल पाती।
पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्र ने बताया कि पंजीकरण के बाद सर्विस प्रोवाइडर्स को संविदा कर्मियों के लिए निर्धारित सेवा शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य किया जा सकेगा।
न्यूनतम भुगतान और भविष्य निधि के हिसाब-किताब पर भी निगाह रखी जा सकेगी।
दुर्घटना बीमा समेत कई सुविधाएं मिलेगी
दुर्घटना में मृत्यु होने पर आश्रितों को पांच लाख रुपये की एकमुश्त सहायता। स्थायी विकलांगता पर तीन लाख रुपए और आंशिक विकलांगता पर दो लाख रुपए की सहायता।
दुर्घटना या बीमारी के कारण पूर्ण या स्थायी रूप से अक्षम हो जाने पर 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन। साइकिल खरीदने के लिए 3000 रुपये की सब्सिडी।
55 वर्ष की आयु पूरी करने और उस समय कम से कम पांच साल तक पंजीकृत रहते हुए अंशदान जमा करने वाले श्रमिकों को 500 प्रतिमाह पेंशन। मृत्यु के बाद आश्रितों को 500 रुपये प्रतिमाह पेंशन।
शिशु हितलाभ, मातृत्व हितलाभ, पुत्री के विवाह के लिए अनुदान, बालिका मदद, आवास सहायता आदि योजनाओं का लाभ।