मंच पर कुलपति प्रो. मनुका खन्ना और आईआईएम कोलकाता के निदेशक डॉ. आलोक कुमार राय। स्रोत ः विवि
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रबंधन अध्ययन संकाय व अशोक विश्वविद्यालय के साझे प्रयास से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुक्रवार को आगाज हुआ। मुख्य अतिथि आईआईएम कलकत्ता के निदेशक प्रो. आलोक कुमार राय ने सम्मेलन को आलोचनात्मक सोच और नवाचार को प्रोत्साहित करने वाला मंच बताया। विशेष अतिथि डॉ. नितिन आर. गोकरन ने कहा कि राज्य का सुशासन व्यवहार आधारित समझ पर ही टिकता है।
मानव व्यवहार पर आधारित इस सम्मेलन में शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और उद्योग से जुड़े विद्वानों ने हिस्सा लिया। कुलपति प्रो. मनुका खन्ना ने कहा कि व्यवहार विज्ञान आज संगठनात्मक विकास और सामाजिक परिवर्तन दोनों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रबंधन अध्ययन संकाय की डीन प्रो. संगीता साहू ने वैश्विक चुनौतियों के समाधान में व्यवहार अनुसंधान की बढ़ती जरूरत पर जोर दिया।
अशोक विश्वविद्यालय की निदेशक डॉ. शेरोन बार्नहार्ड्ट ने नीति निर्माण में व्यवहारिक अंतर्दृष्टि की भूमिका पर विचार साझा किए। मुख्य वक्ता प्रो. एनरिके फटस ने व्यवहार विज्ञान के वैश्विक रुझानों और उनके सामाजिक प्रभावों पर प्रकाश डाला।
पहले पूर्ण सत्र की अध्यक्षता आईआईटी रुड़की के प्रो. एसएन. रंगनेकर ने की। इसमें डॉ. इजाबेल रोड्रिगेज मारिन और डॉ. स्नेहा शशिधरा ने व्यवहार अर्थशास्त्र तथा सामाजिक मानदंडों पर रोचक प्रस्तुतियां दीं।
दूसरे पूर्ण सत्र में मुख्य वक्ता नवीन कुमार जी.एस. ने नीति निर्धारण में व्यवहार परिवर्तन की अहमियत पर जोर दिया। पैनल में आस्था भाखरी, डॉ. अर्चना कपूर, डॉ. अरविंद अवस्थी और मुस्तफा कमाल ने अनुभव साझा किए।