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गोमती मिलाएगी पुराने और नए लखनऊ की राहों को

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प्रदेश सरकार पुराने और नए लखनऊ को जोड़ने के लिए गोमती के किनारों पर सड़कें तैयार करने का प्रोजेक्ट बना रही है। मंत्री शिवपाल सिंह ने इसके लिए इंजीनियरों को निर्देश भी दे दिए हैं। नदी के दोनों ओर पहले से काफी हिस्से में सड़कें हैं लेकिन कई जगहों पर रेल ट्रैक, पुरानी बस्तियों और नदी के मोड़ों की वजह से पूरी तरह जुड़ी नहीं हैं।
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दूसरी ओर कई जगहों पर सड़कें संकरी हैं, जिन्हें चौड़ा करने की भी जरूरत होगी। प्रदेश सरकार की पहल पर सिंचाई विभाग के इंजीनियर प्रस्ताव तैयार करने जा रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने ग्राउंड सर्वे कर इस पहल की व्यवहारिकता, चुनौतियों और संभावनाओं को जानने की कोशिश की।

लाल पुल से जनेश्वर मिश्र पार्क तक गोमती कुल 9.5 किमी क्षेत्र में बह रही है। इस सर्वे के दौरान सामने आया कि अधिकतर हिस्से में नदी केदोनों ओर सड़कें पहले से बनी हुई हैं, लेकिन वे पूरी तरह कनेक्टेड नहीं हैं। वहीं कई स्थानों पर वे आपस में जुड़ी नहीं हैं और संपर्क टूटे हुए हैं।
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कई जगह रेल ट्रैक गुजर रहे हैं, जिससे सड़कों का संपर्क टूटा हुआ है। लेकिन इन चुनौतियों से निपटकर अगर सड़कों का निर्माण किया जा सका और संकरी सड़कें चौड़ी की गईं तो पुराने लखनऊ से नए लखनऊ आने-जाने वाले नागरिकों को सहूलियत होगी तो वहीं ट्रैफिक जाम कम होने से बहुमूल्य समय और ईंधन की भी बचत हो सकेगी।

सिंचाई विभाग के सामने हैं ये सभी चुनौतियां

फिलहाल सिंचाई विभाग के इंजीनियर रूप सिंह कहते हैं कि नदी के चैनलाइजेशन के बाद किनारे ज्यादा सुरक्षित हो रहे हैं। वे कहते हैं कि इसकी वजह से संकरी सड़कों को नदी के हिस्से की ओर चौड़ा करने का विकल्प खुला रहेगा।

पहला पड़ाव : जनेश्वर मिश्रा पार्क और अंबेडकर पार्क के बीच में केवल 800 मीटर की दूरी के बाद सड़क शुरू हो जाती है। लेकिन इस 800 मीटर में जहां एक रेलवे ट्रैक है वहीं अंबेडकर पार्क के आखिरी छोर की दीवार है। इन बाधाओं के आगे अंबेडकर पार्क के सामाजिक सहकारिता भवन से होते हुए चार लेन सड़क है जो गांधी सेतु, लोहिया पथ ब्रिज और गोमती बैराज को पार करते हुए दो किमी आगे कुकरैल नाले तक तैयार बड़े ट्रैफिक का बोझ सहने की क्षमता रखती है।

कुकरैल पुल से आगे नहीं : कुलरैली पुल से करीब 1.5 किमी आगे निशातगंज ब्रिज तक कोई सड़क नहीं है। एक सड़क पेपर मिल कॉलोनी से होकर निकल रही है लेकिन यह बड़े ट्रैफिक के लिए नाकाफी है। निशातगंजपुल से आगे बीरबल साहनी मार्ग होते हुए करीब 2 किमी की सड़क मौजूद है जो नदी के किनारे से सटकर चलती है और यूनिवर्सिटी रोड स्थित ब्रिज तक पहुंचाती है। हालांकि यह भी संकरी है।

डेढ़ किमी चौड़ी सड़क बेधड़क : यूनिवर्सिटी पर हनुमान सेतु से आगे गोमती के किनारे मनकामेश्वर मंदिर मार्ग शुरू हो जाता है और यह काफी चौड़ा है जो करीब डेढ़ किमी आगे डालीगंज पुल तक भारी ट्रैफिक से रहित है। लेकिन इसके आगे फिर संपर्क टूट जाता है। डालीगंज रोड के किनारे बसे मोहल्ले और रेलवे ट्रैक की वजह से आगे बढ़ने के लिए चौड़ी सड़क नहीं है।यहां भी गलियों से होते हुए निकलकर आगे बढ़ना होता है जो पक्का पुल से होते हुए करीब 1.2 किमी दूर जाकर लाल पुल से जोड़ रही हैं।
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और भी चुनौतियां हैं इस राह में

लालपुल से वापसी : वापसी के दौरान लाल पुल से करीब तीन किमी आगे यूनिवर्सिटी रोड पर बने पुल तक नदी के किनारे कोई सड़क नहीं है। इस दौरान शहीद स्मारक से गुजरता महात्मा गांधी मार्ग बना है लेकिन आगे बढ़ते-बढ़ते यह संकरा होने लगता है और ट्रैफिक के लिए समस्या बनता है। यहां सड़क किनारे पार्किंग की वजह से भी मुश्किलें बढ़ती हैं।

हनुमान सेतु से आगे : सेतु से नेशनल कॉलेज रोड तक नदी से सटकर कोई सड़क नहीं है। यह दूरी करीब 5 सौ मीटर है, वहीं इसके आगे बटलर रोड और फ्लाई ओवर शुरू हो जाते हैं, लेकिन ये भी जैसे जैसे आगे बढ़ते हैं बैराज पहुंचने और चार किमी की दूसरी पूरी होते-होते संकरे होते चले जाते हैं। बटलर रोड पर खुलने वाला फ्लाई ओवर बहुत चौड़ी सड़क पर नहीं खोलता। यहां आने और जाने के लिए सिंगल लेन है जहां अधिक ट्रैफिक होने पर निश्चित तौर पर जाम की की स्थिति पैदा होगी।

बैराज से जनेश्वर मिश्रा पार्क : करीब ढाई किमी दूर स्थित बैराज से जनेश्वर मिश्रा पार्क तक अंबेडकर पार्क और गोमती से सटी हुई सिंगल लेन सड़क है। लेकिन ला मार्टिनियर स्कूल के निकट पहुंचने के बाद इस सड़क का सार्वजनिक उपयोग स्कूल नियंत्रित कर रहा है। स्कूल ही तय करता है कि शाम को कितने बजे के बाद वह यहां से वाहनों को निकलना बंद कर देगा और कितने वाहन यहां से जा सकते हैं। कोर्ट में जारी विवादों की वजह से यह हिस्सा नागरिकों के उपयोग के लिए खोलने में समस्या आ सकती है।
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