फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

1800 करोड़ रुपये हो गए खर्च, फिर भी नहीं संवर पाई गोमती

विज्ञापन
गोमती नदी में गिरता कुकरैल नाला। - फोटो : ??? ?????
विज्ञापन
सपा सरकार में करीब 1800 करोड़ रुपये के खर्च से गोमती को संवारने का काम शुरू हुआ। तट सौंदर्यीकरण योजना में करीब 95 प्रतिशत बजट खर्च कर दिया गया।
विज्ञापन

इसके बावजूद करीब 40 प्रतिशत काम अधूरा पड़ा है। नदी को सुंदर और स्वच्छ बनाने का उद्देश्य तो पूरा नहीं हुआ।
इसके उलट नदी से जुड़े वेटलैंड को खत्म कर दिया गया। नदी की वजह से होने वाले भूगर्भ जल रीचार्ज को भी सीमित कर दिया गया।
पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर काम कर रहे विशेषज्ञों का मानना है कि रिवरफ्रंट के सौंदर्यीकरण ने नदी को संवारने की जगह इसको नुकसान पहुंचाने का काम किया है।
प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का खुद मानना है कि इससे पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव का आकलन नहीं किया गया।
इसकी वजह से लंबे समय में बुरे परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। अब जरूरत है कि ऐसे कुछ उपाय किए जाएं कि नदी और भूगर्भ जल के आपसी जुड़ाव को वापस लाया जा सके ।
विज्ञापन

सीवर अभी भी नदी में गिर रहे
कुकरैल और हैदर कैनाल सहित करीब 22 नाले पूरी या आंशिक रूप से अब भी नदी में गिर रहे हैं। रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट में इन नालों को टैप कर सीवर को एसटीपी तक ले जाना था। इसके उलट नदी किनारे अब भी पाइप बिना काम पूरा किए पड़े हैं। पंपिंग स्टेशन भी कुकरैल नाले के पानी को रोेकने में उपयोग नहीं हो रहा।
टॉयलेट, फव्वारे ताले में बंद
रिवरफ्रंट के विकास और यहां घूमने आने वाले लोगों के लिए टॉयलेट, जनसुविधा परिसर, फव्वारे बनाए गए। इनके उपयोग की जगह ताले में सुविधाएं बंद हैं। करीब चार साल से जहां कंटेनर्स में बंद फव्वारा खराब हो रहा है। वहीं टॉयलेट के ताले नहीं खुलने से इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
बिजली तक रिवरफ्रंट को नहीं मिल पाई
8.5 किमी लंबे रिवरफ्रंट पर करीब 90 फ्लडलाइट सिंचाई विभाग ने लगवाईं। किनारों पर पार्क संवारने का काम तीन साल के लिए एलडीए को दे दिया गया। लेकिन, बिजली कनेक्शन नहीं हो पाने से आज भी शाम होते ही पूरा रिवरफ्रंट अंधेरे में डूब जाता है। मार्च में अब एलडीए का समय पूरा हो रहा है। ऐसे में आगे क्या हाल होगा? यह देखने वाला होगा।
विज्ञापन

रिवरफ्रंट विकसित हो, जरूरत नदी संरक्षण की
पर्यावरणविद डॉ. वैंकटेश दत्ता का कहना है कि रिवरफ्रंट के विकास पर केवल पैसा खर्च करना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए। असल में नदी और इससे जुड़े पूरे ईको-सिस्टम का संरक्षण भी होना चाहिए। गोमती नदी भूगर्भ जल पर आधारित नदी है। ऐसे में नदी किनारे या आसपास के वेटलैंड से इसे अलग करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। अब अधूरे कामों को पर्यावरण पर असर को ध्यान में रखते हुए पूरा किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें