बख्शी का तालाब। सोना जीतने वाली बेटियां सिस्टम के आगे बेबस नजर आ रहीं हैं। इससे उनकी चमक, फलक तक पहुंचने से पहले दम तोड़ रही है। जी हां, हम बात कर रहे हैं बख्शी का तालाब इंटर कॉलेज की होनहार बेटियों की। पांच बेटियां (छात्राएं) अयोध्या में 20 अक्तूबर से आयोजित होने वाली प्रदेशीय माध्यमिक विद्यालयी खो-खो प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन इनके पास भोजन, नाश्ते व किराए के लिए पैसे नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि बेटियां अयोध्या में खाली पेट स्टेट प्रतियोगिता को जीतेंगी। इन्हीं बेटियों ने जिला व मंडलीय स्तर पर आयोजित हुई इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक (सोना) जीतकर कॉलेज व क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।
प्रदेश स्तरीय खो-खो प्रतियोगिता में भाग लेने वाली पांच बेटियों ने बताया कि उनका परिवार इतना सक्षम नहीं है कि वह खेलने की व्यवस्था कर सके। स्कूल में पढ़ना ही उनके लिए बड़ी बात है। कॉलेज के क्रीड़ा अध्यायक बच्चूलाल भारती ने बताया कि कॉलेज के संसाधन व निजी सहयोग से वह पूरी कोशिश करते हैं। लेकिन संस्था व सरकार से अगर मदद मिल जाए तो बेटियों को आगे बढ़ने में सहयोग मिलेगा।
राजस्थान के जयपुर में अगस्त माह में आयोजित हुए यूथ गेम में भाग लेने के लिए बख्शी का तालाब इंटर कॉलेज की इन पांच बेटियों की टीम का चयन हो गया था। इसमें 3500 प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क व 1500 किराया वह नहीं दे सकी। इसलिए वह भाग लेने से चूक गई, अगर प्रतिभाग करतीं तो यूपी के गोल्ड मैडल जीत कर लातीं। अब स्वेता वर्मा, राखी विश्वकर्मा, राशी विश्वकर्मा, अंजली और फैजिया सिद्दीकी ने प्रधानाचार्य के जरिये शासन से गुहार लगाई है।
बख्शी का तालाब इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अशोक वाजपेई ने बताया कि छात्राओं को खेलों को लिए बुलाया गया है, लेकिन उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं है। छात्राओं ने बताया कि उनसे भोजन की व्यवस्था खुद करने के लिए गया है।इसकी व्यवस्था सरकार स्तर पर होनी चाहिए।