लखनऊ तस्करी के सोने की खरीद-फरोख्त का केंद्र बन गया है। आयात शुल्क में बेतहाशा बढ़ोतरी होने से ये खेल शुरू हुआ है।
हर रोज यहां दुबई एवं नेपाल से सोने की खेप आ रही है। उधर, कुछ बुलियन कारोबारी (ठोस सोने की खरीद-फरोख्त कर्ता) तस्करी के इस सोने को सस्ते में खरीद कर चांदी काट रहे हैं।
दरअसल, उन्हें घर बैठे ये सोना करीब दो लाख रुपये किलो सस्ता मिल रहा है और इसकी सबसे अधिक खपत चौक सराफा मंडी में हो रही है।
राजधानी के कुछ बड़े कारोबारियों पर जांच एजेंसियों की निगाहें लग गई हैं। हाल में डिपार्टमेंट ऑफ रेवन्यू इंटेलीजेंस की टीम ने चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से तजिन्दर, परमिन्दर व वरिन्दर को दबोचा था।
इन तस्करों ने खुलासा किया था कि वह हर पांचवें दिन अपने नाजुक अंगों में छिपाकर दुबई से सोना लाते थे।
इस खुलासे के बाद ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल की तो खुद सराफा कारोबारियों ने लखनऊ में हो रही सोने की तस्करी को स्वीकार किया और इसका कारण आयात एवं उत्पाद शुल्क का बढ़ना बताया।
कारोबारी सूत्र का कहना है कि तस्करी के सोने की सबसे अधिक खरीद-फरोख्त चौक मंडी में हो रही है। तस्कर दुबई एवं नेपाल से सोना लाकर कुछ बुलियन कारोबारियों को बेच रहे हैं।
सूत्र की मानें तो दुबई और भारत में सोने के दाम में औसतन चार से पांच लाख रुपये प्रति किलो का अंतर है।
प्लेन से दिल्ली फिर ट्रेन और बस से तस्करी
सूत्र बताते हैं कि दुबई से सोना पहले दिल्ली पहुंचता है। इसके बाद बसों के ड्राइवरों एवं कंडक्टरों से साठगांठ करके इसे लखनऊ तक लाया जाता है।
बस से आने वाले सोने के साथ तस्कर नहीं होते हैं, जबकि ट्रेन से तस्कर खुद सोना लेकर आते हैं। यह सोना चौक के अलावा आलमबाग, महानगर एवं अमीनाबाद में कुछ कारोबारी खरीदते हैं।
कारोबारियों को दोतरफा फायदा
कारोबारी तस्करों से सोना खरीदकर उसे गहनों में तब्दील करते हैं। इससे एक तो उन्हें टैक्स की देनदारी से कोई लेना-देना नहीं होता।
दूसरे 10 ग्राम के गहने बेचने पर दो से तीन हजार रुपये का सीधा मुनाफा होता है। वहीं, ऐसे कारोबारी तस्करी के सोने से बने गहने अन्य की अपेक्षा कुछ सस्ते में भी बेचते हैं।