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हॉस्टल में छात्रा ने लगा ली फांसी, यूनिवर्सिटी की इस हरकत पर फूटा स्टूडेंट्स का गुस्सा

Fri, 20 Apr 2018 10:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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धरना-प्रदर्शन करते स्टूडेंट्स। - फोटो : amar ujala
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डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की बीएड छात्रा ने फांसी लगा ली। सहेलियों ने देखा तो तत्काल उतारा और स्कूटी से ले गईं अस्पताल। पर नहीं बची छात्रा की जान।
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मोहान रोड स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की बीएड छात्रा पारुल सिंह (23) ने बृहस्पतिवार दोपहर हॉस्टल में फांसी लगा ली। साथी छात्राओं ने उसे तड़पता देखा तो हॉस्टल की वार्डन सौम्या शंकर को सूचना दी, पर कोई मदद नहीं मिली।

सहेली की जान बचाने के लिए छात्राओं ने कमरे का दरवाजा तोड़कर फंदा काटा और पारुल को स्कूटी से अस्पताल ले गईं। हालांकि उनकी कोशिश नाकामयाब रही और इलाज के दौरान पारुल ने दम तोड़ दिया। आत्महत्या की वजह देर रात तक स्पष्ट नहीं हो सकी थी।
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वहीं, छात्रा की मौत पर छात्र-छात्राओं का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। गुरुवार से शुरू हुई नारोबाजी और प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी है। यूनिवर्सिटी का गेट बंद कर सभी प्रदर्शन कर रहे हैं। स्टूडेंट्स जिम्मेदार अफसरों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़े हैं। इस दौरान गुस्साए छात्रों ने वाहनों में तोड़फोड़ भी की।

कॉलेज का गेंट बंद कर धरना-प्रदर्शन करते स्टूडेंट्स। - फोटो : amar ujala
इंस्पेक्टर अखिलेश चंद्र पांडेय ने बताया कि छात्रा मूलरूप से देवरिया के भाटपार रानी स्थित जगहता गांव की रहने वाली थी। वह बीएड दूसरे सेमेस्टर की स्टूडेंट थी और गर्ल्स हॉस्टल के दूसरे तल पर कमरा नंबर 219 में रूममेट रेनू ललित के साथ रहती थी। शाम करीब सात बजे रेनू कमरे में जाने को आई तो दरवाजा बंद मिला। उसने दरवाजा खटखटाया, पर कोई जवाब नहीं मिला। रेनू ने खिड़की से झांका तो पारुल को खिड़की की ग्रिल से दुपट्टे से लटकी थी।

बकौल रेनू, उसके पैर हिल रहे थे और वह तड़प रही थी। उसने शोर मचाया तो अन्य छात्राएं आ गईं। रेनू ने तत्काल वार्डन सौम्या शंकर को सूचना दी लेकिन वह नहीं आईं। छात्राओं ने केयरटेकर सीमा और रेनू से मदद मांगी, उन्होंने भी हाथ खड़े कर लिए। इसके बाद छात्राओं ने दरवाजा तोड़कर फंदा काटा और पारुल को स्कूटी से पास स्थित एक निजी अस्पताल ले गईं। वहां से उसे इरा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इरा में उपचार के दौरान पारुल ने दम तोड़ दिया।
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स्टूडेंट्स का आरोप- लापरवाह और अमानवीय है विवि प्रशासन

स्टूडेंट् देर रात तक नारेबाजी करते रहे। बॉयज हास्टल से भी छात्र पहुंच गए। सभी ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाह व अमानवीय होने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यदि रेनू की सूचना पर सक्रिय हो जाते पारुल की जान बच जाती। कार्यवाहक कुलपति प्रवीर कुमार को मौके पर बुलाने की मांग की।

फिलहाल नहीं मालूम, क्यों की खुदकुशी
पारुल ने खुदकुशी क्यों की? वह पारिवारिक या निजी कारणों से परेशान थी या फिर कोई और बात थी? यह देर रात तक स्पष्ट नहीं हो सका। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसके पिता कमलापति सिंह को सूचना दे दी है। परिवारीजन घर से लखनऊ के लिए चल चुके हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिवारीजनों के आने में बाद ही खुदकुशी की वजह का पता चल सकेगा।
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