एसजीपीजीआई परिसर में एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इससे एक ही छत के नीचे बच्चों से जुड़ी विभिन्न बीमारियों का उपचार और जांच की सुविधा मिल सकेगी। इस सेंटर में 23 विभाग की स्थापना होगी। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो साल पहले एसजीपीजीआई में एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर बनाने की बात कही गई थी। अब इसकी शुरुआत हो रही है। इस सेंटर पर करीब 19910.52 लाख रुपया खर्च किया जाएगा। पहले चरण में 308 बेड का अस्पताल, प्रशासनिक भवन, फैकल्टी कक्ष आदि तैयार होगा, जबकि दूसरे चरण में 265 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। पहले चरण में बच्चों के उपचार से जुड़े 12 विभाग शुरू होंगे और दूसरे चरण में 11 विभाग बनाया जाएगा। इसमें पीडियाट्रिक आंकोलॉजी, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, इंडोक्राइन, न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, आर्थोपेडिक्स आदि विभाग होंगे।
उपचार से साथ ही तैयार होंगे विशेषज्ञ
एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में कुल 23 विभागों का संचालन किया जाएगा। ऐसे में संबंधित विधा में बच्चों का उपचार होने के साथ ही विशेषज्ञ भी तैयार किए जाएंगे। यदि एक विभाग में एमडी- एमसीएच की दो-दो सीटों को मंजूरी मिली तो हर साल बच्चों के उपचार के लिए 46 विशेषज्ञ तैयार हो सकेंगे। अभी पीडियाट्रिक से जुड़े सुपर स्पेशियलिटी के ज्यादातर विभाग किसी भी राज्य में नहीं है। एसजीपीजीआई में पीडियाट्रिक गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी आदि के विशेषज्ञ हैं। गैस्ट्रो सर्जरी के अलावा अन्य विभागों में यूनिट बनाकर काम चलाया जा रहा है।
अस्पतालों में ऑक्सीजन से जुड़ी सामग्री की रिपोर्ट तलब
एसजीपीजीआई अग्निकांड के बाद प्रदेश के हर अस्पतालों में फायर सेफ्टी आडिट के साथ ही आक्सीजन और उससे जुड़ी सामग्री की उपलब्धता की भी जांच शुरू हो गई है। सभी अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था सुधारने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। इसके बाद प्रदेश मुख्यालय की टीम एक- एक अस्पताल का निरीक्षण करेगी।
चीन में बच्चों में फैली बीमारी और केरल में कोविड के नए स्ट्रेन मिलने के बाद सभी अस्पतालों में 13 से 17 दिसंबर के बीच मॉक ड्रिल किया गया था। इस दौरान कुछ स्थानों पर कमियां पाई गई हैं। इस बीच एसजीपीजीआई में आपरेशन थियेटर के मानीटर में आग लगने से दो मरीजों की मौत हो गई है। इस घटनाक्रम को देखते हुए अब शसान की ओर से सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों एवं अधीक्षकों को अस्पतालों की व्यवस्था के संबंध में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
इसके तहत हर अस्पताल में आक्सीजन की उपलब्धता, आक्सीजन से जुड़े मास्क, पाइप व अन्य सामग्री की उपलब्धता, सर्दी के मौसम में होने वाली इंफ्लूएंजा व अन्य बुखार से जुड़़ी दवाएं, अग्निशमन की व्यवस्था आदि की संयुक्त रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए सीएमओ व सीएमएस को तीन दिन का समय दिया गया है। तीन दिन बाद महानिदेशालय की टीम एक-एक जिले की रैंडम जांच करेगी। रिपोर्ट के अनुसार व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं पाए जाने पर संबंधित अधीक्षक व प्रभारी चिकित्साधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य महानिदेशक ड़ा. दीपा त्यागी ने बताया कि हर अस्पताल में पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। अभी तक कहीं कोई कमी नहीं मिली है। फिर भी घटनाक्रम को देखते हुए दोबारा अलर्ट कर दिया गया है।