गुलाम नबी ने कहा, सर सैयद अहमद हिंदू- मुसलमानों को एक व्यक्ति की दो आंखों की तरह मानते थे। उन्होंने एएमयू में दलितों को आरक्षण देने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। कहा, इसकी स्थापना अल्पसंख्यकों के लिए हुई थी। यहां अच्छी खासी संख्या में बहुसंख्यक समुदाय के लोग भी पढ़ते हैं। इन लोगों ने कभी भेदभाव की शिकायत नहीं की।
अब एक वर्ग विशेष के लिए खोले गए विश्वविद्यालय में दलितों को आरक्षण देकर अल्पसंख्यकों को शून्य पर पहुंचाना कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता।