मुकदमा चला और मॉरिस को करीब एक साल की सजा सुनाई गई। एक अक्तूबर 2025 को वह रिहा होकर बाहर आया। उसे केन्या डिपोर्ट करने का आदेश दिया गया लेकिन दिक्कत यह थी कि मॉरिस के पास न तो वीजा था और न ही पासपोर्ट। ऐसे में उसे केन्या कैसे भेजा जा सकता था।
कोर्ट ने खुले में रखने और दस्तावेज तैयार करने का दिया था आदेश
इस मामले में कोर्ट ने मॉरिस को गाजीपुर थाने में खुले में रखने का आदेश दिया था। साथ ही, केन्या वापस भेजने के लिए दस्तावेजों का बंदोबस्त करने का भी आदेश दिया गया था। बाद मॉरिस को गाजीपुर थाने में रहने की जगह दी गई। पुलिस ने उसके लिए खाने-पीने के साथ अन्य जरूरी व्यवस्था कराई। इसी तरह देखते-देखते 11 माह का वक्त गुजर गया।
जरूरी दस्तावेज तैयार कराकर शुक्रवार को केन्या भेजा गया
गाजीपुर पुलिस ने दूतावास, विदेशी पंजीकरण कार्यालय और एलआईयू की मदद से मॉरिस के सारे जरूरी दस्तावेज तैयार कराए। दस्तावेज तैयार होने के बाद मॉरिस को केन्या भेजने का आदेश जारी किया गया। एडीसीपी पूर्वी अमोल मुर्कुट ने बताया कि शुक्रवार को लखनऊ पुलिस और एलआईयू की एक टीम उन्हें मुंबई लेकर पहुंची। देर रात मुंबई एयरपोर्ट से उसे केन्या डिपोर्ट कर दिया गया।
1995 में पढ़ाई के लिए आया था मॉरिस
पुलिस के अनुसार, मॉरिस 1995 में भारत पढ़ाई के लिए आए थे। उन्होंने फैजाबाद में रहकर बीकॉम किया। इसके बाद लखनऊ से इलेक्ट्रॉनिक्स का कोर्स किया। साथ ही, रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से एमकॉम किया। उस समय तक उसके पास पासपोर्ट और वीजा था। 2005 में उसका पासपोर्ट और वीजा खत्म हो गया था। वह कुछ दिनों तक दिल्ली में रहा और फिर लखनऊ आ गया। इस दौरान वह टीवी, एलसीडी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों की मरम्मत का काम करके अपना खर्च चलाता था।