लखनऊ में शायद ही कोई ऐसा घर-आंगन हो जहां कन्हैया की तरह बाल-गोपालों की शरारतें न दिखती हों। ये शरारतें कभी तंग करती हैं तो कभी मन को सुकून देती हैं। मुख पर माखन की तरह इनमें भोलापन भी लिपटा रहता है। आज के घर-आंगन में भी ऐसे बाल-गोपाल अपनी शरारतों से आपका मन जरूर मोह लेते होंगे। अमर उजाला हर साल की तरह इस बार भी ऐसे ही बाल-गोपालों के साथ जन्माष्टमी मनकार इन पलों को यादगार बनाएगा।
इसके लिए अपने एक से पांच वर्ष तक के बेटे-बेटियों को कन्हैया के विभिन्न रूपों में तैयार कर अमर उजाला के मंच पर लाएं।
कार्यक्रम- 13 अगस्त, दोपहर दो बजे
स्थान- डालीबाग स्थित, अमर उजाला कार्यालय