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Lucknow News: हादसे के पहले घंटे में इलाज मिलने से बच सकती जान

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केजीएमयू।
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लखनऊ। सांप या किसी जहरीले कीड़े के काटने, डूबने और ऊंचाई से गिरने जैसी घटनाओं में शुरुआती इलाज बेहद जरूरी है। ऐसे मरीजों को अस्पताल पहुंचने तक सुरक्षित और स्थिर रखना आवश्यक है। ये जानकारी सोसाइटी ऑफ एक्यूट केयर, ट्रॉमा एंड इमरजेंसी मेडिसिन (एसएसीटीईएम) के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने दीं।
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शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रेक्षागृह में आयोजित कॉमेट-2026 में डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने बताया कि मरीज को शांत रखें और प्रभावित अंग को कम से कम हिलाएं। जहर निकालने के लिए घाव पर कट लगाने या मुंह से जहर चूसने की कोशिश न करें। वहीं, किसी अन्य जहरीले कीड़े काटने पर भी मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सहायता दिलानी चाहिए।
डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने बताया कि पानी में डूबे व्यक्ति को बाहर निकालकर सांस और नाड़ी की जांच करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर सीपीआर शुरू किया जाए। लू लगने पर मरीज को ठंडी और हवादार जगह पर ले जाकर शरीर का तापमान कम करने की कोशिश करनी चाहिए। होश में होने पर पानी या ओआरएस दिया जा सकता है। ऊंचाई से गिरने पर मरीज को अनावश्यक रूप से न हिलाएं और गर्दन व रीढ़ को स्थिर रखें। सभी मामलों में मरीज को जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं। दोनों राज्यों में जंगल, नदियां और पहाड़ी क्षेत्र भी हैं। ऐसे में कई बार मरीज को अस्पताल पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। इस दौरान दिया गया शुरुआती इलाज मरीज की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
मंगलौर स्थित कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज के डॉ. निखिल पॉल ने बताया कि उत्तर प्रदेश के जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के 600 डॉक्टरों, नर्सों और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियनों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में मरीज की जान बचाने के लिए रिससिटेशन, वेंटिलेशन और रक्तस्राव रोकने की तकनीक सिखाई गई। पॉइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
हादसे के पहले घंटे में इलाज से बच सकती है जान
केजीएमयू के ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. समीर मिश्र ने कहा कि सड़क हादसे में घायल की जान बचाने के लिए शुरुआती एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। हादसे के बाद सबसे पहले घायल की स्थिति का आकलन करना चाहिए। अधिक रक्तस्राव होने पर तुरंत दबाव बनाकर खून रोकने का प्रयास करें। गंभीर घायलों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज दिया जाना चाहिए। सांस लेने में दिक्कत होने पर वायुमार्ग खुला रखना जरूरी है। रीढ़ या गर्दन में चोट की आशंका होने पर मरीज को अनावश्यक रूप से न हिलाएं। गंभीर घायल को जल्द ट्रॉमा सेंटर पहुंचाना चाहिए। समय पर रक्तस्राव रोकना और गंभीर मरीज को प्राथमिकता से इलाज देना कई मामलों में जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।
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