सामान्य वर्ग को नौकरी में आरक्षण दिए जाने को लेकर केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। प्रदेश सरकार के निर्देश भी हैं, लेकिन आर्थिक तौर से कमजोर सामान्य वर्ग के आवेदक प्रमाणपत्र पाने को तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं।
तहसील से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि उक्त श्रेणी में अलग से किसी भी तरह का प्रमाणपत्र जारी किए जाने के संबंध में दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। केंद्र सरकार की ओर सामान्य वर्ग को आरक्षण देने के लिए संविधान में 103वां संशोधन अधिनियम के जरिये प्रावधान किया गया है।
एक फरवरी से सरकारी नौकरियों में सामान्य वर्ग के आरक्षण की नई व्यवस्था लागू की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सामान्य वर्ग के पात्रों को इस श्रेणी में आरक्षण का लाभ पाने को आय व जाति प्रमाणपत्र के आधार पर तहसील स्तर से प्रमाणपत्र जारी किए जाने की व्यवस्था की गई है।
इसके बावजूद जिले की पांचों तहसीलों से अभी तक इन प्रमाणपत्रों के जारी किए जाने का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसके चलते ही पांचों तहसीलों में अब तक एक हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं।
इस संबंध में सदर तहसील के उपजिलाधिकारी अभिनव रंजन श्रीवास्तव ने बताया कि सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ पाने के लिए पात्रता सत्यापन के बाद तहसील स्तर से प्रमाणपत्र जारी किए जाने की व्यवस्था की गई है।
संबंधित शासनादेश के बाद भी उक्त श्रेणी में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण प्रमाणपत्र जारी किए जाने के संबंध में स्पष्ट दिशा निर्देश अभी तक तहसीलों में नहीं पहुंचा है। इसीलिए प्राप्त आवेदनों को सिर्फ सत्यापन के लिए जमा कराया जा रहा है।
साथ ही जिलाधिकारी स्तर से प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में जरूरी दिशा निर्देश भी मांगे गए। प्रमाणपत्र संबंधी नए निर्देश मिलते ही सामान्य श्रेणी के आवेदकों को पात्रता के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने का कार्य शुरू किया जाएगा।
ये हैं पात्र
आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के ऐसे सभी परिवारों को लाभ दिए जाने का प्रावधान किया गया है जिनकी सालाना आय इसकी पात्रता के तहत आठ लाख से कम हो और जिनके स्वामित्व में पांच हेक्टेयर से कम जमीन हो या जिनका घर 1000 वर्ग फीट से कम क्षेत्रफल में हो अथवा ग्रामीण क्षेत्र में सौ यार्ड और नगर निगम क्षेत्र में दो सौ यार्ड से कम का भूखंड हो।