यूपी एसटीएफ ने गैंगरेप में आरोपी गायत्री प्रजापति मामले में दो और की गिरफ्तारी की है, लेकिन गायत्री अभी भी फरार है। एसटीएफ ने इस मामले में नोएडा से अशोक तिवारी और आशीष शुक्ला को गिरफ्तार किया है।
वहीं, मिल रही जानकारी के अनुसार, गायत्री मंगलवार या बुधवार को कोर्ट में सरेंडर कर सकता है। उसे पकड़ने के लिए कोर्ट में सादे कपड़ों में पुलिस तैनात की गई है। इस बीच गायत्री के गनर चंद्रपाल को मंगलवार को जेल भेजा जाएगा।
सीओ हजरतगंज अवनीश कुमार मिश्रा ने बताया कि गनर से पूछताछ में गायत्री का कुछ पता नहीं चला लेकिन अन्य आरोपी अमेठी के लेखपाल अशोक तिवारी, गायत्री के निजी सचिव व लखनऊ के रजनी खंड शारदानगर निवासी रूपेश्वर उर्फ रूपेश, गीतापल्ली इको गार्डन के पास रहने वाले बिजनेस पार्टनर विकास वर्मा, गोमतीनगर के विकास खंड निवासी अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह और कानपुर के नौबस्ता के आशीष कुमार शुक्ला के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं।
इनमें से दो आरोपियों की लोकेशन पता चल गई है। इनकी घेराबंदी की जा रही है। जल्द ही इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
वहीं, पुलिस सूत्रों के अनुसार गायत्री की लोकेशन दो दिन पहले दिल्ली में मिली थी। पुलिस की पूछताछ में चंद्रपाल ने खुद को निर्दोष बताया है। उसने कहा कि वह गेहूं में घुन की तरह पिस गया है। महिला से उसका कोई लेना-देना नहीं है। न ही उससे कभी बातचीत हुई।
गायत्री से अकेले में मिलती थी महिला
हेड कांस्टेबल चंद्रपाल ने बताया कि रेप का आरोप लगाने वाली महिला गायत्री से अकेले में मिलती थी। कई बार उसे गौतमपल्ली और अमेठी स्थित आवास पर आते हुए देखा गया।
महिला के साथ कई अन्य लोग भी आते-जाते थे। गायत्री से उसकी मुलाकात चित्रकूट में एक कार्यक्रम में हुई थी। इसके बाद वह हमीरपुर में खनन के ठेके के लिए गायत्री से मिलने लखनऊ आने-जाने लगी।
महिला अक्सर चार-पांच दिन रुकती भी थी। उसके ठहरने का इंतजाम गोमतीनगर के विकास खंड निवासी व गायत्री का करीबी अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू करता था।
कहां है गायत्री? पूछने पर साध ली चुप्पी
- फोटो : amar ujala
सीओ हजरतगंज ने चंद्रपाल से गायत्री के बारे में जानकारी मांगी तो उसने चुप्पी साध ली। बार-बार पूछने पर चंद्रपाल ने कहा कि 27 फरवरी के बाद से गायत्री से उसका कोई संपर्क नहीं हुआ है।
सीओ ने कांस्टेबल चंद्रपाल से पूछा कि अगर वह निर्दोष था तो अब तक पुलिस के सामने क्यों नहीं आया?
इस पर चंद्रपाल ने कहा कि पुलिस की गतिविधियां देखकर उसे लग रहा था कि गायत्री व अन्य लोग जल्द गिरफ्तार हो सकते हैं, इसलिए वह खुद को बचाने के लिए कोर्ट में पैरवी में जुटा था।
इस बीच पुलिस गायत्री सहित किसी आरोपी तक नहीं पहुंच सकी तो उसने कोर्ट में सरेंडर करने की सोची, लेकिन इससे पहले ही दबोच लिया गया।