लखनऊ। गैस संकट रेलवे वर्कशॉप तक पहुंच गया है। गैस न मिलने से इंजनों से लेकर बोगियों की मरम्मत और गर्डरों के निर्माण से लेकर पटरियों के मेंटेनेंस तक के काम प्रभावित होने लगे हैं। लखनऊ में रेलवे की पांच वर्कशॉप हैं, जिनमें प्रतिदिन करीब 60 गैस सिलिंडरों का खर्च है, लेकिन अब कामकाम ठप पड़ गया है।
आलमबाग में रेलवे की कैरिज एंड वैगन वर्कशॉप में बोगियों की मरम्मत होती है। यहां वेल्डिंग व लोहे को पिघलाने के लिए गैस का इस्तेमाल होता है। ऐसे ही अंग्रेजों के जमाने की ऐतिहासिक ब्रिज वर्कशॉप है, जहां रेलवे पुलों के लिए गर्डर बनाए जाते हैं। 150 फीट लंबा गर्डर यहां बनाया जा चुका है, जो रिकॉर्ड है। ऐसे ही लोको वर्कशॉप व डीजल शेड में इंजनों की मरम्मत होती है। साथ ही थर्मिट पोर्शंट प्लांट है। यहां फ्रैक्चर होने पर पटरियों को जोड़ने के लिए लोहा पिघलाया जाता है, लेकिन इन दिनों ये सभी काम बाधित हो रहे हैं।
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यहां प्रतिदिन लगते हैं इतने सिलिंडर
थर्मिट पोर्शंट प्लांट - 8-10
ब्रिज वर्कशॉप - 18-22
कैरिज एवं वैगन वर्कशॉप - 20
लोको वर्कशॉप एवं डीजल शेड - 8 से 10
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हादसे की बढ़ी आशंका
सूत्रों की मानें तो कैरिज एवं वैगन वर्कशॉप में बोगियों की मरम्मत करीब-करीब ठप हो गया है, लिहाजा बोगियों में गड़बड़ी दूर करने में दिक्कतें आ रही हैं, जिससे हादसे की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है। ऐसे ही लोको व डीजल शेड में इंजनों की मरम्मत भी प्रभावित हो रही है।
अफसर परेशान, कर रहे मंथन
सूत्र बताते हैं कि बोगियों व इंजनों की मरम्मत यात्रियों से सीधे तौर पर जुड़ी है, इसलिए अफसर परेशान हैं। वे आला अफसरों के साथ मंथन कर रहे हैं तथा विकल्प तलाश रहे हैं।
रेलवे वर्कशॉप में सन्नाटा।