कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स के व्यापारियों का कहना है कि कपड़ों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से मुक्त रखा जाए। उनकी मांग है कि व्यापारियों के बजाय कपड़ा फैक्ट्रियों पर जीएसटी लगाया जाए।
वहीं, एक व्यापारी उत्तम कपूर ने कहा कि जीएसटी थोपने से लाखों महिलाओं के हाथ से चिकन एवं जरदोजी का काम छिन जाएगा।
अमर उजाला कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित संवाद में कपड़ा व्यापारी अशोक कुमार मोतियानी ने कहा कि केंद्र सरकार ने फैब्रिक्स कपड़े पर 18 फीसदी जीएसटी लगा दिया, जबकि राज्य सरकार का इस पर कोई टैक्स नहीं था।
उन्होंने कहा कि बड़े कपड़ा घरानों की पैरवी पर काउंसिल ने कपड़े पर जीएसटी थोप दिया, जो बर्दाश्त नहीं और इसका विरोध जारी रहेगा।