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अमेठी में दो रानियों के बीच जंग में जनता ने चुनी ‘असली रानी’

Sat, 11 Mar 2017 08:38 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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गर‌िमा स‌िंह
यूपी चुनाव में बेशक चुनाव बहुत रोमांचक रहा लेकिन यहां अमेठी सीट पर सबकी निगाहें टिकी रहीं। वजह भी है क्योंकि यह पहला मौका है कि जब एक राजा की दो रानियों ने राजमहल और राजनीतिक विरासत के लिए चुनाव मैदान में एक-दूसरे को चुनौती दी। देखें क‌िसको क‌ितने वोट म‌िले...
 
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अमीता स‌िंह
अमेठी की जनता ने असली रानी यानी भाजपा से गरिमा स‌िंह को चुना है। उन्होंने 57994 वोटों के साथ जीत दर्ज की है जबक‌ि कांग्रेस से मैदान में उतरीं डॉ संजय स‌िंह की दूसरी पत्नी अमीता सिंह चौथे नंबर पर हैं। उन्हें कुल 19021 वोट म‌िले हैं। सपा प्रत्याशी गायत्री प्रजापत‌ि दूसरे नंबर पर हैं और तीसरे नंबर पर बसपा से रामजी हैं। 

 
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अमीता स‌िंह
वैसे तो अमेठी गांधी परिवार का परंपरागत सियासी गढ़ होने के नाते हमेशा चर्चा में रहता है और हर चुनाव में देश-दुनिया की निगाहें इस सीट पर लगी रहती है लेकिन इस बार राजघराने की दोनों रानियों के आमने-सामने होने से यह सीट और भी अहम हो गई है।

 

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गर‌िमा स‌िंह
गरिमा सिंह जहां अपना स्वाभिमान हासिल करने की मंशा से सियासी समर में आगे आई हैं वहीं अमीता सिंह संजय सिंह की सियासी विरासत पर अपना दावा बरकरार रखने के लिए मैदान में उतरीं।
 
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अमीता स‌िंह
सपा से गठबंधन के बाद टिकट न मिलने की आशंका को देखते हुए अमीता ने बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद संजय सिंह ने कांग्रेस हाईकमान पर दबाव डालकर अमीता का टिकट फाइनल कराया। 

 
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गर‌िमा स‌िंह
कांग्रेस खासकर गांधी परिवार के सियासी गढ़ में सेंधमारी के लिए भाजपा ने अमेठी राजपरिवार को ही हथियार बनाया। भाजपा ने संजय सिंह की पत्नी गरिमा सिंह को टिकट देकर बड़ा दांव चला तो कांग्रेस ने भाजपा के  इस दांव को विफल करने के  लिए अमीता को आगे कर दिया है।

 
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गायत्री प्रजापति
2012 में सपा के गायत्री प्रसाद प्रजापति ने अमीता सिंह को हराकर इस सीट पर कब्जा किया था। इस बार गठबंधन में भी यह सीट सपा कोटे में गई है लेकिन अमीता की जिद के चलते कांग्रेस को उन्हें टिकट देना पड़ा। गरिमा सिंह पहली बार चुनाव मैदान में उतरीं। उन्हें संजय सिंह ने 1995 में तलाक दे दिया था। उसके बाद 19 साल तक उन्हें राजमहल में घुसने नहीं दिया गया। 

 
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गर‌िमा स‌िंह
काफी जद्दोजहद के बाद गरिमा 2014 में अपने बेटे के साथ महल में आने में कामयाब हुईं। अब वह अपने स्वाभिमान के लिए चुनाव मैदान में उतरी हैं। दूसरी तरफ अमीता सिंह सियासत का जाना-पहचाना चेहरा बन चुकी हैं। अमीता विधायक के साथ-साथ मंत्री भी रह चुकी हैं। राजपरिवार की विरासत को लेकर चल रहे आपसी संघर्ष में परिवार बंट चुका है। संजय सिंह अमीता के साथ मजबूती से खड़े हैं तो उनकी पहली पत्नी गरिमा सिंह के साथ उनका बेटा अनंत विक्रम सिंह है।


सियासत और राजघराने की लड़ाई के बीच अमेठी की जनता भी पहली रानी गरिमा सिंह के साथ खड़ी दिखाई दी। चुनाव में जनता ने गरिमा सिंह के पक्ष में वोट दिया। 
गरिमा सिंह (भाजपा) -57994
गायत्री प्रजापत‌ि (सपा)- 53070
रामजी (बसपा)- 26084
अमीता सिंह (कांग्रेस)- 19021
 
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