(मनोज त्रिवेदी)। गंगा एक्सप्रेसवे पर रविवार की शाम हुए हादसे ने कोडर और चूली गांव के हर शख्स को भीतर तक हिला दिया है। कोडर गांव की 13 साल की अर्चना ने हादसे के खौफनाक मंजर को अपनी आंखों से देखा था। जिस बाद से वह गुमसुम सी है। उसे चीखती लड़कियों और खून के निशान बेचैन कर रहे हैं। रह-रहकर उसे मौज के मंजर की याद दहला जाती है। अर्चना ने ही सबसे पहले मौत बनकर आ रही कार को देखा था।
अर्चना बताती है कि भंडारे में शामिल होने के बाद वह अन्य लड़कियों के साथ घटनास्थल पर खड़े होकर बात कर रही थी। सभी साथ-साथ आगे बढ़ने लगे। इस दौरान शाम सात बजे पूरब की ओर से बहुत तेज रफ्तार में एक कार को सभी ने नजदीक आते देखा। इस पर हमने सभी से कहा कि वो देखो कार आ रही है। इतना सुनते ही सब इधर उधर भागने लगे और इसी बीच कार ने नौ लड़कियों को कुचल डाला। हादसे में वह उछल कर एक्सप्रेसवे से नीचे गिर गई थी। थोड़ी देर बाद उसको होश आया तो सड़क पर लोगों की चीखें और खून देखा। वह अभी तक इस सदमे से बाहर नहीं निकल पा रही है।
कोडर गांव में पसरा सन्नाटा
- फोटो : amar ujala
कोडर गांव में जहां चहल-पहल रहती थी वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव की गलियां सूनी हैं और लोग हादसे को रह-रह कर याद करते हैं। रविवार को हुए हादसे में चार युवतियों की मौत के बाद से गांव में मातम पसरा है। मृतक युवतियों के परिजनों के आंसू अभी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उधर पांच घायल बेटियों का अलग- अलग अस्पताल में इलाज जारी है।