लखनऊ। साइबर हाइट्स बिल्डिंग के चौथे तल के फ्लैट में फर्जी कॉल सेंटर चला रहा गिरोह पहले तो अमेरिकी नागरिकों को फुसलाकर रकम ऐंठने का प्रयास करता था। जब वे जाल में नहीं फंसते थे तो उन्हें डराता था। इसके लिए गिरोह के लोग खुद को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट या फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) का अधिकारी बताते थे।
डीसीपी दीक्षा शर्मा ने बताया कि आरोपी पहले पीड़ितों का व्हाट्सएप नंबर हासिल करते थे। फिर उन्हें जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट का फर्जी इनवेस्टिगेशन लेटर और एफटीसी के अधिकारी का कार्ड भेजते थे। इसके बाद आरोपी उनसे मन मुताबिक रकम ऐंठ लेते थे। डर के कारण पीड़ित शिकायत नहीं करते थे। गिरोह पुलिस की पहुंच से दूर रहने के लिए ठगी का तरीका बदलता रहता था।
सोना-चांदी और गिफ्ट कार्ड के जरिये होती थी रकम की हेराफेरी
सरगना सूरज ने बताया कि वे पीड़ितों से रकम अमेरिका में बैठे साथियों के खातों में ट्रांसफर कराते थे। अमेरिका में रकम को सोने-चांदी और गिफ्ट कार्ड में बदल दिया जाता था। फिर हवाला के जरिये उसे लखनऊ में सरगना और उसके साथियों को भेजा जाता था। कभी-कभी वे सीधे रकम भी भेजते थे ताकि कोई सबूत न छूटे।
बरामद सामान
डीसीपी ने बताया कि पुलिस को आरोपियों के पास से 31 लैपटॉप, 32 माउस, 14 मोबाइल फोन, 35 लैपटॉप चार्जर और हेडफोन, 18 लाख रुपये, सरगना सूरज की कार, एप्पल कस्टमर सपोर्ट की फर्जी वेबसाइट, यूआरएल व सर्च हिस्ट्री की प्रिंटआउट शीट और दो राउटर बरामद हुए हैं।