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Lucknow News: फर्जी दस्तावेज से लोन हासिल करने वाले गैंग का सरगना गिरफ्तार

Mon, 16 Feb 2026 02:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
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आरोपी आमिर अहसन व बरामद कारें।
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लखनऊ। 100 से अधिक लोगों के दस्तावेज का दुरुपयोग कर मुद्रा लोन के माध्यम से धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के सरगना मऊ के मोहम्मदाबाद गोहना सैयदवाड़ा निवासी आमिर अहसन को यूपी एसटीएफ ने रविवार को मड़ियांव से गिरफ्तार किया। इस मामले में एसटीएफ 13 सितंबर को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की जानकीपुरम शाखा के मैनेजर गौरव सिंह और उनके तीन साथियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इस गिरोह ने फर्जीवाड़े से करोड़ों रुपये कमाए हैं।
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एसटीएफ के एडिशनल एसपी विशाल विक्रम सिंह के अनुसार, हजरतगंज के नरही निवासी कारोबारी राज बहादुर गुरुंग को कारोबार के लिए ऋण की आवश्यकता थी। उन्होंने जानकीपुरम स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में परिचित इंद्रजीत सिंह की मदद से ऋण के लिए आवेदन किया था। हालांकि, इंद्रजीत और उसके साथियों ने ऋण दिलाने के बजाय, राज बहादुर के हस्ताक्षरित दस्तावेज का दुरुपयोग किया। इसके बाद, 28 अप्रैल 2023 को 9.80 लाख रुपये का मुद्रा ऋण और 10 मई 2023 को 15 लाख रुपये का कार ऋण हासिल कर लिया। राज बहादुर की शिकायत पर एसटीएफ ने जांच शुरू की, जिसमें बैंक मैनेजर गौरव सिंह की संलिप्तता सामने आई। इसी आधार पर 13 सितंबर की रात एसटीएफ ने सुशांत गोल्फ सिटी स्थित न्यू हजरतगंज अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 719 से विकासनगर निवासी आरोपी मैनेजर गौरव सिंह, ठाकुरगंज निवासी नावेद हसन, तालकटोरा निवासी अखिलेश तिवारी और ठाकुरगंज निवासी इंद्रजीत सिंह को गिरफ्तार किया था।
आरोपियों से पूछताछ में आमिर अहसन का नाम सामने आया था। सर्विलांस की मदद से रविवार को एसटीएफ ने आईआईएम रोड निकट सहारा होम्स मड़ियांव से आमिर को गिरफ्तार किया। आरोपी के पास दो इनोवा क्रिस्टा, एक एक्सयूवी 500, सियाज कार, एक मोबाइल फोन, एक आधार कार्ड, तीन डेबिट कार्ड, एक डीएल और 730 रुपये बरामद किए।
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2017 में किया था डिप्लोमा, 2018 में शुरू की ठगी
आमिर अहसन ने बताया कि उसने 2017 में यूनिटी कॉलेज हुसैनाबाद से ड्राफ्ट्समैन का डिप्लोमा किया। 2018 में रिश्तेदार के माध्यम से उसकी मुलाकात नावेद से हुई। वर्ष 2017 में, नावेद के खिलाफ एसबीआई के ब्रांच मैनेजर ने धोखाधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें तकी अब्बास, अवनीत कौर, कल्बे रजा आब्दी, जैन रिजवी और तारिक के नाम भी सामने आए थे। कुछ समय बाद, नावेद और आमिर ने पैसे कमाने के लिए फर्जी तरीके से ऋण लेकर रकम हड़पने की साजिश रची।


कई बैंक प्रबंधकों से सांठगांठ
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि 2019 में, आमिर ने नावेद की मुलाकात विजय शुक्ला और शुभम मिश्रा से कराई थी। शुभम मिश्रा ने नावेद को पंजाब एंड सिंध बैंक, बिरहाना के मैनेजर से मिलवाया था। आमिर ने बताया कि वे विभिन्न बैंकों के प्रबंधकों से सांठगांठ करते थे और फर्जी दस्तावेज के साथ फर्जी पते पर पंजीकृत कंपनियों से कोटेशन देते थे। इसके बाद, वे दूसरे व्यक्तियों के दस्तावेज पर लगी तस्वीरों को एडिट कर अपने गिरोह के लोगों की तस्वीरें लगाते और उनके नाम पर हस्ताक्षर कर मुद्रा ऋण हासिल कर लेते थे।


करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया

अब तक की जांच में एसटीएफ को पता चला है कि इस गिरोह ने फर्जी ऋणों के माध्यम से करोड़ों रुपये की कमाई की है। इस संबंध में विस्तृत जांच जारी है। आरोपियों के बैंक खातों और वालेट की जानकारी जुटाई जा रही है। आमिर के पास से मिले मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।


इस तरह से गैंग करता था काम
एसटीएफ के अनुसार, दस्तावेज में हेरफेर करने का काम नावेद, आमिर अहसन और अखिलेश तिवारी करते थे। इंद्रजीत उन ग्राहकों को लाता था जिन्हें ऋण की जरूरत होती थी। आरोपी इंद्रजीत की तस्वीर को दूसरे व्यक्तियों के दस्तावेज पर लगाकर ऋण के लिए आवेदन करता था। इसके बाद, इंद्रजीत सिंह बैंक शाखा में जाकर, जिसके नाम पर दस्तावेज होते थे, उसके हस्ताक्षर बना देता था। फर्जी ऋण से मिले रुपये को आपस में बांट लिया जाता था।

आरोपी आमिर अहसन व बरामद कारें।

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