लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में लिफ्टों की बदहाली मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। सालाना डेढ़ करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खपाने के बाद भी अस्पताल की लिफ्टें आए दिन फंस रही हैं। आरोप है कि अफसरों और इंजीनियरों की मिलीभगत से लिफ्ट मरम्मत का पूरा खेल सिर्फ कागजों पर चल रहा है और बजट में बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा है।
केजीएमयू परिसर में मरीजों और डॉक्टरों की सुविधा के लिए कुल 170 लिफ्टें लगाई गई हैं। इनकी देखरेख और मरम्मत के नाम पर हर साल 1.5 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से जारी होते हैं। इसके बावजूद ज्यादातर लिफ्टें कंडम हालत में हैं। आपातकालीन स्थिति में भी गंभीर मरीजों को लिफ्ट के भीतर फंसे रहकर तड़पना पड़ता है। कर्मचारियों और तीमारदारों का आरोप है कि लिफ्ट मरम्मत के नाम पर इंजीनियर और ठेकेदार मिलकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं।
हाल ही में हुए बड़े हादसे
25 मई को टीजी हॉस्टल की लिफ्ट में एक दंपती एक घंटे तक फंसे रहे। लिफ्ट के अंदर दम घुटने से दोनों बेहोश हो गए थे। कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला जा सका था।
इससे पहले आठ मई को शताब्दी फेज-2 की लिफ्ट भी अचानक खराब हो गई थी, जिसमें डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी करीब 10 मिनट तक कैद रहे। अलार्म भी नहीं बजा था।
10 मई को शताब्दी फेज-2 के ही मरीज वाले ब्लॉक में दो तीमारदार करीब आधे घंटे तक लिफ्ट के भीतर फंसे रहे।