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Lucknow News: तकनीकी, सूचना केंद्रित व बहुआयामी होंगे भविष्य के युद्ध ः सीडीएस

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थिंकटैंक स्ट्राइव इंडिया की ओर से हुआ विशेष संवाद कार्यक्रम।
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लखनऊ। भविष्य के युद्ध तकनीकी, सूचना केंद्रित और बहुआयामी होंगे। ऐसे में तीनों सेनाओं का संयुक्त रहना जरूरी है। इसके लिए थिएटराइजेशन और संयुक्त सैन्य सुधार आवश्यक है। यह कहना है सेना के चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान का।
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वह मंगलवार को लखनऊ में थिंकटैंक स्ट्राइव इंडिया की ओर से आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। ‘डिफेंस विज़न 2047’ और भविष्य के युद्धों की बदलती प्रकृति पर बातचीत हुई। भारतीय सेना में चल रहे आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया। तीनों सेनाओं के बीच सामंजस्य, परिचालन एकीकरण और स्वदेशी क्षमताओं के विकास में हो रही प्रगति को कार्यक्रम में रेखांकित किया गया। थिएटराइजेशन के मुद्दे पर सीडीएस ने कहा कि थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल से त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे। एकीकृत परिचालन योजनाएं बनाई जा सकेंगी। सैन्य संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।
स्टार्टअप्स, उद्योग का योगदान जरूरी

सीडीएस ने भविष्य की रक्षा तैयारियों में आधुनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर भी विचार व्यक्त किए। कहा कि एआई, स्वायत्त प्रणालियों, ड्रोन, साइबर तकनीकों को सेना में शामिल करने के लिए उद्योग जगत, शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स और एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर दीर्घकालिक निर्भरता कम होगी। साथ ही अनुसंधान और नवाचार को मजबूती भी देनी होगी।
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पारंपरिक युद्ध की गुंजाइश नहीं
संवाद में पारंपरिक युद्ध से इतर ‘कॉग्निटिव वॉरफेयर’, जो मानसिक या वैचारिक स्तर पर लड़ा जाता है तथा ‘इनफॉर्मेशन वाॅर’ पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सीडीएस ने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाएंगे, बल्कि बदले रूप में नजर आएंगे। इसके लिए भ्रामक सूचनाओं और शत्रुतापूर्ण प्रचार के खिलाफ रणनीतिक संचार व संस्थागत सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।

बहुआयामी युद्ध के लिए रणनीतिक सोच में बदलाव
नौसेना और वायुसेना के आधुनिकीकरण पर बोलते हुए सीडीएस ने आधुनिक निगरानी प्रणालियों, एकीकृत हवाई रक्षा क्षमताओं, नेटवर्किंग बुनियादी ढांचे और लंबी दूरी के सटीक प्रहार प्रणालियों के विकास को रेखांकित किया। बहुआयामी युद्ध के लिए सैन्य आधुनिकीकरण केवल नए हथियारों या प्लेटफॉर्म्स की खरीद तक सीमित नहीं रह सकता। तेजी से बदलते और जटिल वैश्विक सुरक्षा माहौल में पूर्व सैन्य अधिकारियों का अनुभव, रचनात्मक जुड़ाव और संस्थागत ज्ञान देश के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण है।

थिंकटैंक स्ट्राइव इंडिया की ओर से हुआ विशेष संवाद कार्यक्रम।

थिंकटैंक स्ट्राइव इंडिया की ओर से हुआ विशेष संवाद कार्यक्रम।

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