मुंह का कैंसर सिर्फ गुटखा, पान, मसाला या दांत की चोट से ही नहीं फंगस की समस्या से भी हो सकता है।
मुंह के भीतर किसी तरह का संक्रमण कैंसर का कारक बन सकता है।
मौजूदा समय में फास्ट फूड के प्रयोग के चलते भी लोग कैंसर की चपेट में आ रहे हैं।
कैंसर पीड़ित को सही समय पर सही इलाज मिल जाए तो उसे शुरूआती दौर में दवाओं के जरिए फैलने से रोका जा सकता है।
ये जानकारी मंगलवार को इंडियन एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल पैथालॉजिस्ट की कार्यशाला के दूसरे दिन पैथालॉजिस्ट डॉ. विन्नी टंडन ने दी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में फंगस की समस्या बेहद गंभीर है।
मुंह के भीतर फंगस वायरस के अटैक से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। सर्दी जुकाम, नाक बंद होना की समस्या आम है।
अगर लंबे समय तक ये समस्या रहे तो तुरंत इसका इलाज कराना चाहिए।
मरीजों की जांच रिपोर्ट में पता चला है कि कई दिन तक नाक बंद होने की समस्या के चलते नाक की हड्डी के पीछे फंगस हो जाते हैं।
कई दिनों तक फंगस अटैक के चलते पीड़ित का पूरा स्कल (मस्तिष्क की हड्डी) खत्म हो जाती है।
फंगस वायरस के चलते पहले तो मुंह के भीतर मवाद बनने लगता है।
उसके बाद उससे होने वाला संक्रमण मुंह के कैंसर को जन्म देता है। इससे बचने के लिए सर्दी जुकाम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
चार पांच दिन से अधिक नाक का बंद होना और गले में कसाव होने की समस्या फंगस अटैक का लक्षण है।
फास्ट फूड का सेवन मुंह की कई गंभीर बीमारियां दे रहा है।
मेरठ मेडिकल कॉलेज के डॉ. विजय वाधवन ने बताया कि स्पाइसी फास्ट फूड मुंह की नाजुक कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
स्पाइसी अधिक होने से मुंह के उन टीस्यू को अधिक नुकसान होता है जो लार्वा बनाते हैं।
स्पाइसी फूड खाने से मुंह में पहले तो जलन होती है उसके बाद उसमें छोटे-छोटे घाव हो जाते हैं।
लापरवाही बरतने पर यही घाव विकराल रूप धारण कर लेता है और धीरे-धीरे यही संक्रमण पूरे मुंह में फैल जाता है।
मुंह की साफ-सफाई रखने से कई तरह की संक्रमित बीमारियों से बचा जा सकता है।
केजीएमयू के डॉ. शालिन चंद्रा ने बताया कि रात को सोने से पहले मुंह को अच्छे से साफ करना चाहिए।
स्पाइसी फास्ट फूड खाना खाने से बचना चाहिए। दांत की सफाई के साथ मुंह की साफ-सफाई पर ध्यान देना चाहिए।
अगर मुंह में संक्रमण हो जाए या बार बार किसी तरह की समस्या हो रही है तो डेंटिस्ट से चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।