- लखनऊ विश्वविद्यालय के शिल्पकला महाविद्यालय पर बदहाली की मार
- जरूरी संसाधनों के बिना पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। तकनीक के जमाने में अब सामान्य से लेकर आर्ट और डिजाइनिंग के तक के काम बगैर कंप्यूटर के नहीं होते हैं। वहीं, दूसरी ओर लखनऊ विश्वविद्यालय के शिल्पकला महाविद्यालय (शिल्पकला संकाय) में विद्यार्थी डिजानिंग का अभ्यास मैनुअली कर रहे हैं। महाविद्यालय में कहने को तो एक पुरानी कंप्यूटर लैब है, लेकिन उसके सिस्टम चालू हालत में नहीं हैं। ये बेहद पुराने और आउटडेटेड हो चुके हैं। इसके चलते विद्यार्थी पिछड़ते जा रहे हैं।
शिल्पकला महाविद्यालय पर बदहाली की मार है। शासन से सीमित बजट मिलने के बाद महाविद्यालय लविवि का सौतेला व्यवहार झेल रहा है। कला एवं शिल्प महाविद्यालय 1911 में अपनी स्थापना से लेकर 1975 तक स्वायत्त संस्था के रूप में चलता रहा। 1975 में कॉलेज को लविवि में मिला दिया गया। इसके बावजूद शासन की ओर से कॉलेज और विवि का बजट अलग-अलग दिया जाता है। इसे खर्च करने का अधिकार लविवि के पास ही होता है। दोनों का बजट अलग-अलग आने की वजह से लविवि अपने अन्य स्रोतों की आय कला एवं शिल्प महाविद्यालय पर खर्च नहीं करता है। इस वजह से महाविद्यालय की हालत दिन पर दिन खराब होती जा रही है। कला एवं शिल्प महाविद्यालय का बजट फ्रीज होने के बाद से हर साल शासन की ओर से 96 लाख रुपये का बजट दिया जाता है। इस राशि में नई कंप्यूटर लैब तो दूर सामान्य मरम्मत तक नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से महाविद्यालय में अव्यवस्था बनी हुई है।
इंडस्ट्री में नहीं मिलता काम महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने बताया कि इस समय इंडस्ट्री में ज्यादातर काम कंप्यूटर आधारित होता है। हम लोग सिर्फ मैनुअली काम ही कर पाते हैं। ऐसे में इंडस्ट्री में नौकरी पाने के हमारे मौके कम हो जाते हैं। इसके अलावा हमारा सिलेबस भी काफी पुराना है। जरूरत के हिसाब से इसमें बदलाव न होने की वजह से भी डिग्री के बाद नौकरी के मौके नहीं बन पाते हैं।
पाठ्यक्रम और उनमें सीटें
बीवीए-पेंटिंग रेग्युलर-18 सीटें, बीवीए-पेंटिंग सेल्फ फाइनेंस-14, बीवीए-अप्लाइड आर्ट रेग्युलर-18, बीवीए-अप्लाइड आर्ट सेल्फ फाइनेंस-14, बीवीए-मूर्तिकला रेग्युलर-14, बीवीए-मूर्तिकला सेल्फ फाइनेंस-5, बीएफए- टेक्सटाइल डिजाइन सेल्फ फाइनेंस-10, डिप्लोमा इन आर्ट मास्टर ट्रेनिंग-रेग्युलर-18, डिप्लोमा इन होम आर्ट एंड होम क्राफ्ट-रेग्युलर-10, डिप्लोमा इन फर्नीचर डिजाइन-रेग्युलर- 10, डिप्लोमा इन आयरन एंड हेवी मेटल वर्क-रेग्युलर-10, डिप्लोमा इन वुड वर्क-रेग्युलर-10, एमवीए-अप्लाइड आर्ट-20, एमवीए-पेंटिंग-35, एमवीए-मूर्तिकला-12।
कोट-
फंड की बेहद कमी
महाविद्यालय में फंड की बेहद कमी है। इसके लिए शासन को भी कई बार पत्र लिखा जा चुका है। फंड मिलने पर ही सभी समस्याओं का समाधान संभव है।
-डॉ. रतन कुमार डीन, कला एवं शिल्प महाविद्यालय