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यूपी : फंड 1000 करोड़, मदद एक भी स्टार्ट अप को नहीं, मुख्यमंत्री योगी नाखुश

Sun, 15 Mar 2020 02:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा अनिल श्रीवास्तव, लखनऊ
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स्टार्ट-अप
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अफसरशाही के ढुलमुल रवैये के कारण केंद्र की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी स्टार्ट अप योजना यूपी में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। कहने को तो प्रदेश में स्टार्ट अप में जान फूंकने को 1000 करोड़ रुपये का फंड बनाया गया है, लेकिन अब तक एक भी स्टार्ट अप को इससे मदद नहीं मिल पाई है।

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तीन साल में प्रदेश में लगभग 1800 स्टार्ट अप ही पंजीकृत हो सके हैं। इन्हें सहूलियत देने के लिए महज 18 इन्क्यूबेशन सेंटर ही बने हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टार्ट अप की निराशाजनक स्थिति पर खासी नाराजगी जाहिर की है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने स्टार्ट अप के लिए बने कार्पस फंड से दी जाने वाली सहायता में ढिलाई बरते जाने पर अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए इसकी अड़चनें तत्काल दूर करने को कहा है। 

उन्होंने निर्देश दिए हैं कि शासन स्तर पर अंतरविभागीय समन्वय समिति बनाई जाए और विभागों के  लिए स्टार्ट अप के लक्ष्य तय करके उसे पूरा कराने के लिए सतत निगरानी की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि मौजूदा स्टार्ट अप नीति के क्रियान्वयन में आने वाली दिक्कतों को चिह्नित कर नई नीति में उसे दूर किया जाए। 
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मुख्यमंत्री के  कड़े रुख के बाद कार्पस फंड के लिए सिडबी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने व उ. प्र. स्टार्ट अप नीति 2017 में संशोधन की कवायद तेज हो गई है। बता दें कि हाल ही में सीएम ने स्टार्ट अप की समीक्षा की। इसमें सामने आया कि दूसरे राज्यों के मुकाबले यूपी काफी पीछे चल रहा। 

स्टार्ट अप में यूपी की हिस्सेदारी सिर्फ 6.7 प्रतिशत
समीक्षा में सामने आया कि बीते तीन साल में भारत सरकार के उद्योग संवर्द्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीआईपीपी) में यूपी के कुल 1817 स्टार्ट अप पंजीकृत हुए। यह पूरे देश की तुलना में सिर्फ 6.7 फीसदी ही है। प्रदेश में पंजीकृत स्टार्ट अप में 65 प्रतिशत से ज्यादा नोएडा, गाजियाबाद व लखनऊ में हैं। बुंदेलखंड व पूर्वांचल में स्टार्ट अप को लेकर लोगों में खास दिलचस्पी नहीं है।

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यूपी में स्टार्ट अप का हाल

शहर    स्टार्ट अप
नोएडा    633 
लखनऊ    300
गाजियाबाद    296
कानपुर नगर    98
वाराणसी    59
मेरठ    51
अन्य जिले    380

स्कूल-कॉलेज से युवाओं को स्टार्ट अप के लिए तैयार करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने इस बात भी जोर दिया है कि स्कूल-कॉलेज से ही बच्चों-युवाओं को स्टार्टअप के लिए तैयार किया जाए। विश्वविद्यालयों में उद्यमिता सेल बनाए जाएं जिससे युवाओं को मानसिक तौर पर अपना उद्यम स्थापित करने को तैयार किया जा सके। जानकारों का कहना है कि अब स्टार्ट अप को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) से भी जोड़ा जाएगा। इससे लोग स्थानीय स्तर पर ही जिले की पहचान वाले उत्पाद की इकाई से स्टार्ट अप की शुरुआत कर सकेंगे।

सिडबी के साथ एमओयू जल्द 
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया कि हम स्टार्ट अप को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। जहां तक 1000 करोड़ रुपये के  कार्पस फंड का सवाल है तो इसके लिए अभी सिडबी के साथ एमओयू होना है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। जल्द एमओयू कर लिया जाएगा।
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