विधानसभा में कथित विस्फोटक मिलने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम ने बुधवार को यहां महानगर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के अधिकारियों से पूछताछ की। टीम ने उनसे जांच में जल्दबाजी से लेकर जांच के उपकरणों तक के बारे में जानकारी जुटाई।
जानकारी के अनुसार, एनआईए के अधिकारियों ने एफएसएल लखनऊ के निदेशक श्याम बिहारी उपाध्याय व उनके सहयोगियों से जानना चाहा कि कैसे यहां के एक्सपर्ट ने विधानसभा में मिले पाउडर को चंद मिनटों में ही पीईटीएन साबित कर दिया? जबकि इसकी विस्तृत जांच में काफी समय लगता है।
एफएसएल निदेशक पर कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि डीजीपी मुख्यालय ने एफएसएल के निदेशक श्याम बिहारी उपाध्याय के खिलाफ कार्रवाई के लिए गृह विभाग से सिफारिश कर दी है। डीजीपी सुलखान सिंह ने तकनीकी सेवा के डीजी महेंद्र मोदी को पीईटीएन संबंधी मामले में हुए पत्राचार के बारे में जांच के लिए कहा था।
इसमें श्याम बिहारी उपाध्याय के खिलाफ कई बातें सामने आईं। हालांकि इस बारे में पूछे जाने पर सचिव गृह मणि प्रसाद मिश्रा ने कहा कि अभी निदेशक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
गौरतलब है कि आगरा की लैब में हुई जांच में संदिग्ध पदार्थ के पीईटीएन साबित न होने से विवाद पैदा हो गया था। आरोप है कि इस मामले में एफएसएल लखनऊ के निदेशक श्याम बिहारी उपाध्याय ने शासन में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह किया था।
चंडीगढ़ लैब की रिपोर्ट का इंतजार
एनआईए को अब चंडीगढ़ सीएफएसएल भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही एनआईए अपनी जांच आगे बढ़ाएगी। जरूरत हुई तो विधानसभा की सीट नंबर 80 पर बैठने वाले विधायकों से पूछताछ करेगी। इससे पहले एटीएस ने हैदराबाद सीएफएसएल को सैंपल भेजा था। उसकी रिपोर्ट भी अब तक नहीं आई है।